महाराणा उदय सिंह के गुरु ने बनवाया ये चमत्कारिक मंदिर - Dhuni Mata Mandir Dabok Udaipur, इसमें उदयपुर के डबोक में धूणी माता मंदिर की जानकारी दी गई है।
उदयपुर के डबोक एरिया में महाराणा प्रताप एयरपोर्ट के सामने नाहरा मगरा पहाड़ी के ऊपर लगभग 500 साल से धूणी माता के रूप में हिंगलाज माता विराजमान है जिसे धूणी माता हिंगलाज भैरव भवानी शक्तिपीठ नाहरा मगरा पर्वत धूणेश्वर धाम कहा जाता है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मंदिर को बड़ा चमत्कारिक मानते हैं और बताते हैं कि माता सभी भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करती हैं जैसे किसी को संतान सुख मिला है तो किसी को नौकरी मिली है।
लोगों का ये विश्वास है कि साल 2002 में उदयपुर सीमेंट फैक्ट्री बंद हो जाने के कारण जब हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे तब माता की विशेष पूजा अर्चना करने से ही साल 2012 में ये फैक्ट्री फिर से शुरू हुई और हजारों लोगों को फिर से रोजगार मिला।
बताया जाता है कि जब महाराणा उदय सिंह उदयसागर झील बनवा रहे थे, तब एक सिद्ध संत जगन रावल झील के पास पहाड़ी पर रहा करते थे।
इस एरिया में देवड़ा राजपूत ज्यादा रहा करते थे और वे संत जगन रावल को अपना कुलगुरु मानते थे। महाराणा उदय सिंह भी जब संत से मिले तो वो भी इनसे प्रभावित हुए और इन्हें अपना धर्मगुरु बना लिया।
जब झील का निर्माण हुआ तब संत ने इसकी पाल पर राज भैरव स्थापित करके ये जगह छोड़ दी और बेड़च नदी के किनारे चलते हुए नांदवेल आए। नांदवेल में उन्होंने नांदवेल महादेव स्थापित किया।
इसके बाद ये नाहरा मगरा पहाड़ पर आकर रहने लगे। यहाँ पर इन्होंने धूणी माता के इस मंदिर को बनवाकर इसमें हिंगलाज माता और भैरव को विराजित किया। ऐसा बताते हैं कि माता की स्थापना के लिए संत जगन रावल पाकिस्तान के बलूचिस्तान से हिंगलाज माता की ज्योत लेकर आए थे।
अपने अंत समय में संत जगन रावल ने इस जगह जीवित समाधि ले ली थी। यही वो जगह है जहाँ पर कभी महाराणा फतेह सिंह के गुरु देव रावल भी रहा करते थे।
मंदिर परिसर में आज भी देवड़ा कुलगुरु जगन रावल, देव रावल के साथ कई दूसरे गुरुओं की समाधियाँ मौजूद हैं। मंदिर परिसर में एक गुफा या सुरंग भी बताई जाती है।
लेखक (Writer)
रमेश शर्मा {एम फार्म, एमएससी (कंप्यूटर साइंस), पीजीडीसीए, एमए (इतिहास), सीएचएमएस}
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