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चला के ग्राम करणपुरा के समाजसेवी तेजपाल सैनी को नीमकाथाना में अखिल भारतीय कुशवाह महासभा तथा राजस्थान माली जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में सवित्रीबाई फुले जयंती पर आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया।

पत्रिका टीवी के लिए सबसे ज्यादा न्यूज़ और वीडियो भेजने के साथ प्रिंट के लिए भी खबर, विज्ञापन और वितरण विभाग तक में बेहतरीन भूमिका निभाने पर आज श्रीमाधोपुर से महेंद्र जी सैनी को प्रथम, पलसाना से रणजीत सिंह जी को द्वितीय और दांता रामगढ़ से राजेश जी वैष्णव को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

श्रीमाधोपुर। इलाके के आंगनवाड़ी पाठशालाओ में गुरूवार को भामाशाहों द्वारा स्वेटर वितरित किए गए। कड़ाके की सर्दी में स्वेटर मिलते ही बालक चहक उठे। महिला प्रयवेक्षक सुमन बिजारणियां ने बताया कि आंगनबाडी पाठशाला डूंगरवाली के बच्चों को भामाशाह हरिनारायण चौधरी ने बैठने के लिए कुर्सिया व विनोद बिहारी कुमावत ने बच्चों को सर्दी से बचने के लिए स्वेटर भेंट किये।

श्रीमाधोपुर। इलाके की ग्राम पंचायत फूटाला के खुर्रमपुरा गाँव स्थित 32 केवी जीएसएस पर किसानों ने अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में धरना देकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया।

राजस्थान युवा बोर्ड और राजस्थान सरकार की ओर से युवा कलाकारों की खोज के लिए जयपुर में दुर्गापुरा स्थित कृषि प्रबंधन संस्थान में 8 और 9 जनवरी को राज्य स्तरीय युवा सांस्कृतिक प्रतिभा खोज महोत्सव प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे सीकर जिले के हरजनपुरा गाँव के सारंगी वादक मुकेश कुमार राणा ने सारंगी प्रतियोगिता में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

श्रीमाधोपुर। इलाके के ग्राम पटवारी का बास में बुधवार को चायनीज मांझे से एक मोर घायल हो गया जिसे ग्राम के लोगों ने पशु चिकित्सालय मे दिखाकर वन विभाग को सौंप दिया। ग्राम के विक्रम सिंह उर्फ रविन्द्र सिंह सामरा व जयनारायण धूड ने बताया कि दोपहर में एक जांटी के पेड में चायनीज मांझा उलझा हुआ था जिसमें एक मोर फंस गया जिससे मोर के दोनों पांव जख्मी हो गए।

कहते हैं कि कलाकार बनाए नहीं जा सकते हैं बल्कि कलाकार अपनी कला के साथ पैदा होते हैं। कला में रूचि तथा उसमे पारंगतता एक नैसर्गिक गुण होता है जिसका संवर्धन तो किया जा सकता है परन्तु उसे किसी में पैदा नहीं किया जा सकता है। विरले ही होते हैं जिन्होंने अपनी रूचि के विरुद्ध कोई कार्य किया हो तथा उसमे सफलता पाई हो। अगर माना जाए तो कला एक इबादत है और अगर कला का रूप संगीत हो तो फिर वह साक्षात देवी सरस्वती की वंदना होती है।

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की कलक्टर स्वाति मीना नायक श्रीमाधोपुर तहसील के छोटे से गाँव बुरजा की ढाणी की रहने वाली हैं। वर्ष 2007 में इन्होंने साढ़े बाईस वर्ष की उम्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की परीक्षा को अपने प्रथम प्रयास में उत्तीर्ण कर 260 वीं रैंक प्राप्त की।

शौक और जरूरत में बड़ा फर्क होता है। जरूरत अपने साथ मजबूरियों को जन्म देती हैं जबकि शौक हमेशा खुशियाँ ही पैदा करता है। अधिकतर लोगों का प्रथम लक्ष्य किसी विषय विशेष की पढ़ाई कर फिर उसी से सम्बंधित क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाने का होता है। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई किसी एक क्षेत्र विशेष में की हो तथा अपना भविष्य किसी अन्य क्षेत्र में तलाशा हो। बहुत कम लोग लीक से हटकर चलने का जज्बा पैदा कर पाते हैं परन्तु अगर ढूँढा जाये तो कुछ लोग जरूर मिल जाते हैं। लीक से हटकर चलने वाली ऐसी ही एक शख्सियत है सीकर जिले के खंडेला कस्बे के पास में स्थित एक छोटे से गाँव महरों की ढाणी निवासी सुनील कुमार गुर्जर।

श्रीमाधोपुर कस्बा अनेक संतों की आश्रय स्थली रहा है जिनमे से कुछ संतों के प्रति क्षेत्रवासियों का लगाव तथा आस्था चरम पर रही है। ऐसे संतों में से एक प्रमुख संत हैं श्री आत्मानंद जी जिन्हें ब्रह्मचारी बाबा के नाम से भी जाना जाता है।

आज हम जिस स्वतंत्र हवा में साँस ले रहे हैं, जो स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं, यह हमें बहुत संघर्ष तथा त्याग के पश्चात मिला है अन्यथा एक दौर ऐसा भी था जब ऐसा महसूस होता था कि हमारी साँसे भी हमारी किस्मत की तरह गुलाम होकर रह गई है। यह वह दौर था जब देश अंग्रेजों की गुलामी का दंश झेल रहा था। उस दौर में कुछ ऐसे लोगों ने जन्म लिया जिन्हें गुलामी की जिन्दगी न तो स्वयं को स्वीकार्य थी तथा न ही वो अपने राष्ट्र को गुलाम देखना चाहते थे।

स्वतन्त्रता सेनानियों का जीवन त्याग और बलिदान की वह प्रेरणा गाथा रहा है जो भावी पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणा स्त्रोत रहेगा। श्रीमाधोपुर क्षेत्र की धरती का स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से अविस्मर्णीय योगदान रहा है जिसे न तो पिछली पीढ़ियाँ भुला पायी हैं तथा न ही आगामी पीढ़ियाँ भुला पाएँगी। श्रीमाधोपुर क्षेत्र से कई स्वतन्त्रता सेनानियों का उदय हुआ जिनमे श्री मालीराम सैनी का नाम भी स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास के पन्नों में प्रमुखता के साथ स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

एक समय ऐसा भी था जब अमेरिका, यूरोप के देशों सहित दुनिया के अन्य देशों की नजर में भारत का सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रूप से कोई महत्त्व नहीं समझा जाता था। इन देशों द्वारा भारत को केवल सपेरों एवं जादूगरों का देश ही समझा जाता था।

वर्ष 2016 सितम्बर में टेलिकॉम क्षेत्र में रिलायंस जिओ के धमाकेदार प्रवेश के बाद से सभी टेलिकॉम कंपनियों में हडकंप मचा हुआ है। रिलायंस जिओ की फ्री सेवाओं तथा आक्रामक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी ने अन्य कंपनियों के लाभ को घाटे में बदलना शुरू कर दिया है।

यूपीए सरकार ने जब आधार को शुरू किया था तब किसी ने भी इसकी महत्ता के बारे में नहीं जाना था। जब तत्कालीन सरकार ने इसको कुछ योजनाओं में लागू किया था तब ही यह दिखने लग गया था कि भविष्य में यह सरकार की सभी योजनाओं में लागू हो जाएगा। अब वह वक्त आ गया है जब धीरे-धीरे आधार सभी जगह अनिवार्यता बनता जा रहा है।

राजस्थान के कई इलाकों में एक लोकोक्ति अक्सर बोली जाती है कि अमुक का तो डीडवाना डूब गया। यही बात इन दिनों प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए भी सही साबित होती दिख रही है। डीडवाना में लगे राष्ट्रविरोधी नारों से भाजपा सरकार का चाहे बाल भी बाँका न हुआ हो लेकिन राष्ट्रवाद का झूठा दम्भ भरने वाले फर्जी स्वयंसेवक रूपी मंत्रियों का ईमान तो डूब ही गया।

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साइंस स्ट्रीम से बारहवीं करने के पश्चात अधिकतर विद्यार्थियों का प्रमुख उद्देश्य डॉक्टर या इंजीनियर बनना होता है। दूसरी तरफ इनके अलावा कुछ ऐसे भी विद्यार्थी होते हैं जो डॉक्टर, इंजीनियर ना बनकर कुछ और ही बनना चाहते हैं परन्तु किसी अन्य विकल्प के बारे में पर्याप्त ज्ञान नहीं होने की वजह से उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आता है तथा वे अपने भविष्य को लेकिन चिंतित तथा भ्रमित रहते हैं।

सलमान खान अपने द्वारा प्रस्तुत रियलिटी शो बिग बॉस के ग्यारहवें संस्करण की कमाई को बताने में भले ही हिचकते हों परन्तु उन्होंने हाल ही में यह बताया कि उनकी पहली कमाई के बतौर उनको पचहत्तर रूपए मिले थे। वैसे सूत्रों के अनुसार सलमान बिग बॉस को होस्ट करने के लिए प्रति एपिसोड ग्यारह करोड़ रूपए की फीस चार्ज कर रहे हैं।

सम्पूर्ण विश्व में 10 जनवरी को तेरहवाँ विश्व हिंदी दिवस (वर्ल्ड हिंदी डे) मनाया जा रहा है परन्तु यह भी एक विडम्बना ही है कि इसे भी विश्व हिंदी दिवस की जगह वर्ल्ड हिंदी डे के रूप में ही प्रचारित किया जा रहा है। कम से कम इस दिन सभी लोगों को पूर्णरूपेण हिंदी भाषा का प्रयोग कर लेना चाहिए। यह दिवस सम्पूर्ण विश्व में हिंदी भाषा को प्रचारित करने के लिए मनाया जाता है।

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