एशिया में मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील - Jaisamand Lake in Hindi, इसमें उदयपुर के पास महाराणा जय सिंह द्वारा बनवाई झील की जानकारी है।
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आज हम आपको एक ऐसी झील के बारे में बताने जा रहे हैं जो एशिया में मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है।
यह झील इतनी ज्यादा बड़ी है कि इसके बीच में सात टापू मौजूद हैं और जिनमें कुछ पर आदिवासी परिवार रहते हैं। बारिश के मौसम में इस झील में 9 नदियों और 99 नालों का पानी आता है।
चारों तरफ से अरावली की पहाड़ियों से घिरी झील के पास एक वाइल्ड लाइफ सेंचुरी भी मौजूद है जिसमें कई तरह के दुर्लभ जीव जन्तु रहते है।
तो चलिए आज हम प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस ऐतिहासिक झील को देखकर इसके इतिहास के बारे में जानते हैं, आइए शुरू करते हैं।
जयसमंद झील की विशेषताएँ - Features of Jaisamand Lake
उदयपुर के पास मौजूद इस झील का नाम जयसमंद झील है जिसे ढेबर झील भी कहा जाता है। यह झील किसी जमाने में एशिया में मीठे पानी की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील हुआ करती थी लेकिन जब से गोविन्द वल्लभ पंत सागर झील बनी है तब से इस झील का स्थान दूसरा हो गया है।
जब यह झील पानी से पूरी तरह भरी होती है तब इसका एरिया लगभग 87 वर्ग किलोमीटर होता है। इतनी ज्यादा बड़ी होने की वजह से इसे राजस्थान का समुद्र भी कहा जाता है।
लगभग 27 फीट भराव क्षमता वाली इस झील का पानी रोकने के लिए 375 मीटर लंबा और 35 मीटर ऊँचा बाँध बना हुआ है जिसको सफेद संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है।
मुख्य बाँध को सुरक्षित रखने के लिए इससे लगभग 100 फीट की दूरी पर एक और बाँध बनवाया गया और फिर इन दोनों के बीच के हिस्से को भरवाकर उसमें पेड़ पौधे लगाए गए। आज भी इस हिस्से पर एक सुंदर बगीचा बना हुआ है।
झील की पाल की निचली सीढ़ियों के आगे मार्बल के सुंदर हाथी बने हुए हैं। झील का पानी जब अंतिम छोर के हाथी के पैरों की जंजीर तक पहुँचता है तब झील ओवरफ्लो होकर छलकने लग जाती है।
बताते हैं कि पुराने समय में जब पानी हाथियों की उठी हुई सूंड तक पहुँचता था तब यह झील ओवरफ्लो होती थी लेकिन एक बार झील के निचले इलाकों में पानी भरने के बाद इसकी ऊँचाई कम कर दी गई।
झील की पाल के दोनों किनारों पर सुंदर महल बने हुए हैं। उत्तरी छोर के महल को महाराणा फतेह सिंह ने बनवाया था। दक्षिणी छोर के महल महाराणा जय सिंह ने बनवाए थे जिनका जीर्णोद्धार महाराणा सज्जन सिंह ने करवाया था।
इन महलों में राजपरिवार के लोग गर्मी के मौसम में रहने के लिए आया करते थे। महाराणा जयसिंह ने झील के पीछे जयनगर बसाकर उसमें बावड़ी के साथ कुछ इमारतें भी बनवाई थी जिनमें कुछ के खंडहर आज भी दिखाई देते हैं।
पाल के ऊपर सफेद रंग की 6 छतरियाँ बनी हैं। इन छतरियों के बीच में यानी 3 छतरियों के बाद नर्बदेश्वर महादेव का मंदिर बना हुआ है। बताया जाता है कि इसे महाराणा जयसिंह ने बनवाया था।
झील को भरने के लिए इसमें 9 नदियों और 99 नालों का पानी आता है। झील में गोमती, झामरी, सिरौली, रूपारेल, मकरेडी, खैराली, बूढ़ल, सरणी और वागर नदियों का पानी आता है। नालों में सबसे बड़े नाले का नाम वगुरवा नाला है।
जयसमंद झील में कुल 7 टापू मौजूद हैं जिनमें सबसे बड़े टापू का नाम बाबा का भागड़ा या मंगरा और सबसे छोटे का पियारी या पायरी है। इन टापुओं में कुछ पर आदिवासी परिवार रहते हैं और कुछ बिल्कुल निर्जन हैं।
टापुओं पर रहने वाले लोगों के आने जाने का एकमात्र सहारा नावें ही हैं। बच्चे भी अपने स्कूल में नावों से ही आते-जाते हैं। झील के किनारे पर कई गाँव भी मौजूद हैं जिनमें हजारों लोग रहते हैं।
झील में बोटिंग की सुविधा है जिसके अंतर्गत झील का एक लंबा चक्कर कटवाया जाता है। बोटिंग करते समय आपको झील के आगे पहाड़ों में रूठी रानी के महल के साथ घना जंगल भी नजर आता है।
आप कभी झील के पास जाएँ तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि इसके पानी में कई जलीय जीव जन्तु रहते हैं जिनमें काफी सारे मगरमच्छ भी बताए जाते हैं।
झील का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता इसकी सबसे बड़ी खासियत है। झील से किसानों को खेती के लिए पानी देने के साथ उदयपुर शहर को पीने का पानी भी मिलता है।
झील के बीच बने टापू पर रिसोर्ट बना हुआ है जहाँ पर देशी-विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। झील के पास जयसमंद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी मौजूद है जिसमें पैंथर, हिरण, जंगली सूअर, चार सींग वाले हिरण, नेवले और कई तरह के प्रवासी पक्षी रहते हैं।
साल 2023 में इस सेंचुरी में पैंथर सफारी शुरू हो चुकी है और अब ईको टूरिज्म की कई ऐक्टिविटीज जैसे जिप लाइन, ट्री वाक, कैफेटेरिया आदि शुरू करने की तैयारी है।
जयसमंद झील का इतिहास - History of Jaisamand Lake
अगर हम जयसमंद झील के इतिहास के बारे में बात करें तो इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में महाराणा जयसिंह ने गोमती नदी के पानी को रोककर करवाया था।
दो पहाड़ियों के बीच पक्की पाल बनाकर बनवाई गई यह झील उस समय एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित मीठे पानी की झील थी।
ऐसा बताया जाता है कि इसके उद्घाटन के दिन महाराणा जय सिंह ने अपने वजन के बराबर सोना तुलवाकर दान में दिया था। इस झील को विजय का महासागर या राजस्थान का समुद्र कहा जाता है।
जयसमंद झील के पास घूमने की जगह - Places to Visit near Jaisamand Lake
अगर हम जयसमंद झील के पास घूमने की जगह के बारे में बात करें तो आप इसके पास फॉरेस्ट एरिया में पहाड़ी पर बने हवामहल और रूठी रानी के महल को देखने के साथ पैंथर सफारी कर सकते हैं।
जयसमंद झील कैसे जाएँ? - How to reach Jaisamand Lake?
अब हम बात करते हैं कि जयसमंद झील कैसे जाएँ? जयसमंद झील उदयपुर-सलूम्बर मार्ग पर मौजूद है। उदयपुर रेल्वे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 50 किलोमीटर है।
उदयपुर से इस झील तक जाने के लिए बढ़िया रोड़ बनी हुई है। आप अपनी कार, टैक्सी या फिर बाइक से यहाँ पर जा सकते हैं। उदयपुर से जयसमंद जाते समय बीच में केवड़ा की नाल नाम का जंगल आता है जिसमें बाइक से गुजरना बड़ा शानदार लगता है।
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जयसमंद झील की मैप लोकेशन - Map location of Jaisamand Lake
जयसमंद झील का वीडियो - Video of Jaisamand Lake
जयसमंद झील की फोटो - Photos of Jaisamand Lake
लेखक (Writer)
रमेश शर्मा {एम फार्म, एमएससी (कंप्यूटर साइंस), पीजीडीसीए, एमए (इतिहास), सीएचएमएस}
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।