Shrimadhopur Ke Emerging Painter Hain Gorishankar Soni, श्रीमाधोपुर के उभरते चित्रकार गोरीशंकर सोनी

श्रीमाधोपुर कस्बे के निवासी गौरीशंकर ने हाल ही में 20 जनवरी तक जुनेजा आर्ट गैलरी में लगी पेंटिंग एग्जीबिशन ‘एक्सप्लोरिंग सागाज ऑफ द आनसेंग’ में एक्रेलिक रंगों से बनाई 25 पेन्टिंग्स प्रदर्शित की।

41 साल के चित्रकार गौरीशंकर सोनी आठ देशों को अपनी कला के मुरीद कर चुके हैं। वे अब नई पीढ़ी को एचिंग तकनीक से चित्रकारी के गुर निशुल्क दे रहे हैं। अब तक 60 बच्चों को ट्रेनिंग दे चुके हैं।

गौरीशंकर कला के क्षेत्र में पिछले 25 साल से हैं। चार फीट की नाव पर पेंटिग में राजस्थानी पगड़ी पहने लोगों के भाव को दर्शाया। ये कलाकृति इजिप्ट के एक इंटरनेशनल सिम्पोजियम में वर्चुअली दिखाई गई।

गौरीशंकर सोनी ने 2007 में आर्टिस्ट ग्रुप के साथ सिंगापुर, थाइलैंड, मलेशिया, 2009 में हंगरी, रोमानिया, 2010 में अफ्रीका आर्ट एग्जीबिशन, 2019 में मिस्त्र और 2020 में ट्यूनीशिया में अपनी कला का प्रदर्शन कर तारीफ बटोरी।

Shrimadhopur Ke Emerging Painter Hain Gorishankar Soni

2015 में जवाहर कला केंद्र की सुरेख कला दीर्घा में गौरीशंकर सोनी का इंस्टालेशन वर्क काफी चर्चित रहा था। शो में 27 कैंडल थे। इन पर कृतियां चित्रित की गई थी।

गौरीशंकर का कहना है कि नए कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा कला प्रदर्शनी कराते रहते हैं। सीखने आने वाले नए कलाकारों को एवं आर्ट क्लासों में चित्रकारी की निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं।

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गौरीशंकर के सृजन में राजस्थान के चटख रंगों की आभा के साथ यहां की ऐतिहासिक धरोहर, रहन-सहन, उत्सव, त्योहार और पहनावा समाए हुए हैं। 2019 में गौरी शंकर ने इजिप्ट के पिक्टोरियल एक्सीपीरियंस को राजस्थान के संदर्भ से जोड़ते हुए चित्रित किया।

20 साल की उम्र में मिला था सर्वोच्च राज्य कला पुरस्कार

गौरीशंकर सोनी ने कस्बे के गढ़ स्कूल से सैकंडरी की। 1996 में जयपुर में आर्ट ऑफ स्कूल में दाखिला लिया। इसी दौरान पोस्टर प्रतियोगिता में 500 रुपए का पुरस्कार मिला तो कला के इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मोटिवेशन मिला।

इसके बाद 1998 में 20 साल की उम्र में राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से दिए जाने वाले छात्र कला पुरस्कार एवमं अकादमी का सर्वोच्च राज्य कला पुरस्कार मिला।

2008 व 2011 में भी राज्य कला पुरस्कार मिला। सोनी जब दो साल के थे तब पिता महेश कुमार सोनी का निधन हो गया था। पुश्तैनी काम के साथ वे चित्रकारी में आगे बढ़ते करते रहे।

एचिंग तकनीक में कृतियां हैं खास : एचिंग तकनीक में जिंक की प्लेट पर चित्रकारी करते हैं। फिर उन रेखाओं पर एसिड व इंक से एचिंग करते हैं।

इससे रेखाओं के घुमाव के हिसाब से इंक प्लेट पर हुए स्क्रेचिस में भर जाती है। बाद में कलाकार मल्टीपल प्रिंट बनाते हैं।

Compiled By

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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