पकौड़ा पॉलिटिक्स के बीच पिसता हुआ युवा - इस कविता में पकौड़ा पॉलिटिक्स की वजह से युवाओं के दिलों की व्यथा को व्यक्त किया गया है. राजनेताओं द्वारा पकौड़े तलने को एक रोजगार माने जाने पर आज के युवाओं की सोच को दर्शाया गया है.

अपने जीवन को बनते देख जुआ
वजीरे आजम की इस सलाह से बहुत निराश आज का युवा
कि पकौड़े तलना एक रोजगार है
जो पकौड़े नहीं तल सकता, सही मायनों में वही बेरोजगार है।

जब से बेरोजगारी के नए उपायों में पकौड़ा दर्शन लागू हुआ
तब बेरोजगारी का इलाज लगने लगा सिर्फ ईश्वर की दुआ
नेताओं के तो भाषण ही उनके शासन बन जाते हैं
सत्ता के मद में ये बेरोजगारों से सिर्फ पकौड़े तलवाते हैं।

सभी नेता गण वादे करके क्यों मुकर जाते हैं?
अपने किए हुए वादों को जुमला क्यों बतलाते हैं?
ऐसा लगता है कि वादे करके मुकर जाना नेताओं का जन्मसिद्ध अधिकार है
तभी तो बेरोजगार, गरीब तथा आम आदमी का सम्पूर्ण जीवन ही बेकार है।

रोजगार का वादा करके जिन्हें मंझधार में छोड़ दिया
अपना इच्छित लक्ष्य पाकर बेरोजगारों से मुँह मोड़ लिया
वादा था हर वर्ष करोड़ों नौकरियों का, कम से कम लाखों तो देते
उम्मीद बनाये रखने के लिए कुछ और जुमले ही कह देते।

हुक्मरान के अनुचरों की अगुवाई में आज घर-घर पकौड़ा गान हो रहा है
ऐसा लगता है कि पकौड़ा ही बेरोजगारों का भगवान हो रहा है
वह दिन दूर नहीं जब पकौड़ा रोजगारेश्वर जैसी श्रद्धा पाएगा
रोजगार के पूरक श्रद्धेय पकौड़े को फिर कोई कैसे खाएगा?

पकौड़ा पॉलिटिक्स के बीच पिसता हुआ युवा

गलियों से संसद तक “पकौड़ा रोजगार” का गुणगान बढ़ा है
ऐसा लगता है कि आम आदमी पकौड़ा ज्ञान के लिए ही खड़ा है
कोई राज्यसभा में तो कोई अन्यत्र पकौड़ा भक्ति में लीन हुआ
सभी भक्तजनों का मन पकौड़ा चालीसा में पूर्णतया तल्लीन हुआ।

पकौड़े तलने वालों की शान में चार चाँद लगने लगे
पकौड़े की रेहड़ी लगाने वालों से रातों रात लोग जलने लगे
पकौड़ा टीवी तथा पकौड़ा न्यूज पर हर जगह इनके किस्से चलने लगे
समझदार है ये लोग जो शिक्षा में वक्त बिगाड़े बिना पकौड़े तलने लगे।

शायद जल्द ही “पकौड़ा रोजगार मंत्रालय” तथा “पकौड़ा रोजगार मंत्री” सामने आएँ
कई किस्म के पकौड़े तलवाकर “पकौड़ा रोजगार मंत्री” बेरोजगारों के हाथ थामते जाएँ
बेरोजगारों को केवल एक शर्त पर बाँटा जाएगा “पकौड़ा रोजगार लोन”
केवल “जिओ डिजिटल लाइफ” के साथ आपको करना होगा एक फोन।

बेरोजगारों की सत्ता प्रमुखों से यही इल्तजा है कि शिक्षा का मखौल ना उड़ाइए
हर वर्ष करोड़ों रोजगार देने के जो वादे किए हैं बस उन्हें निभाइए
रोजगार के अवसर ना देकर, सरकार की नाकामियों को पकौड़ों के पीछे मत छुपाइए
बेरोजगारों को रोजगार चाहिए, उनसे रोजगार के नाम पर पकौड़े मत तलवाइए।

पकौड़े तलने के लिए उच्च शिक्षा की जरूरत नहीं होती है
उच्च शिक्षित युवा जब पकौड़े तलता है तो ज्ञान की देवी रोती है
पकौड़े तलना कोई गर्व की बात नहीं, यह तो पेट पालने की मजबूरी है
अगर इसमें गर्व नजर आता है, तो क्या, आज से हर नेता पुत्र के लिए पकौड़े तलना जरूरी है?

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