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Fri, Jan

कहते हैं कि कलाकार बनाए नहीं जा सकते हैं बल्कि कलाकार अपनी कला के साथ पैदा होते हैं। कला में रूचि तथा उसमे पारंगतता एक नैसर्गिक गुण होता है जिसका संवर्धन तो किया जा सकता है परन्तु उसे किसी में पैदा नहीं किया जा सकता है। विरले ही होते हैं जिन्होंने अपनी रूचि के विरुद्ध कोई कार्य किया हो तथा उसमे सफलता पाई हो। अगर माना जाए तो कला एक इबादत है और अगर कला का रूप संगीत हो तो फिर वह साक्षात देवी सरस्वती की वंदना होती है।

शौक और जरूरत में बड़ा फर्क होता है। जरूरत अपने साथ मजबूरियों को जन्म देती हैं जबकि शौक हमेशा खुशियाँ ही पैदा करता है। अधिकतर लोगों का प्रथम लक्ष्य किसी विषय विशेष की पढ़ाई कर फिर उसी से सम्बंधित क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाने का होता है। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई किसी एक क्षेत्र विशेष में की हो तथा अपना भविष्य किसी अन्य क्षेत्र में तलाशा हो। बहुत कम लोग लीक से हटकर चलने का जज्बा पैदा कर पाते हैं परन्तु अगर ढूँढा जाये तो कुछ लोग जरूर मिल जाते हैं। लीक से हटकर चलने वाली ऐसी ही एक शख्सियत है सीकर जिले के खंडेला कस्बे के पास में स्थित एक छोटे से गाँव महरों की ढाणी निवासी सुनील कुमार गुर्जर।

Kunal Verma's school level education completed at Shrimadhopur and college level education completed at University of Rajasthan in Jaipur. He started his journey in 2002 from his hometown Shrimadhopur in Sikar district in Rajasthan. He chose his initial career as a graphic designer and wanted to be the best in that field. He started practicing graphic designing by his own. So he left home at 2003 after getting a job of Rs 2500 for a month.

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