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आज हम जिस स्वतंत्र हवा में साँस ले रहे हैं, जो स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं, यह हमें बहुत संघर्ष तथा त्याग के पश्चात मिला है अन्यथा एक दौर ऐसा भी था जब ऐसा महसूस होता था कि हमारी साँसे भी हमारी किस्मत की तरह गुलाम होकर रह गई है। यह वह दौर था जब देश अंग्रेजों की गुलामी का दंश झेल रहा था। उस दौर में कुछ ऐसे लोगों ने जन्म लिया जिन्हें गुलामी की जिन्दगी न तो स्वयं को स्वीकार्य थी तथा न ही वो अपने राष्ट्र को गुलाम देखना चाहते थे।

स्वतन्त्रता सेनानियों का जीवन त्याग और बलिदान की वह प्रेरणा गाथा रहा है जो भावी पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणा स्त्रोत रहेगा। श्रीमाधोपुर क्षेत्र की धरती का स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से अविस्मर्णीय योगदान रहा है जिसे न तो पिछली पीढ़ियाँ भुला पायी हैं तथा न ही आगामी पीढ़ियाँ भुला पाएँगी। श्रीमाधोपुर क्षेत्र से कई स्वतन्त्रता सेनानियों का उदय हुआ जिनमे श्री मालीराम सैनी का नाम भी स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास के पन्नों में प्रमुखता के साथ स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

पंडित बंशीधर शर्मा का जन्म 1904 में आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी के दिन श्रीमाधोपुर के गोछल्डी में हुआ था। इनके पिताजी का नाम पंडित बद्रीनारायण तथा माताजी का नाम श्रीमती गोरा देवी था। इनके माता पिता दोनों बहुत सुसंस्कृत, धार्मिक विचारों वाले संस्कारी लोग थे। बंशीधर बाल्यकाल से ही बहुत प्रतिभाशाली थे तथा इन पर इनके माता पिता के उच्च आदर्शों तथा संस्कारों का अत्यधिक प्रभाव पड़ा जिसकी वजह से इनकी प्रतिभा निखरती चली गई।

श्री बालूराम सैनी का जन्म 12 जनवरी 1922 को श्रीमाधोपुर के पुष्पनगर में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री भीखाराम सैनी था। इनकी शिक्षा मिडिल स्तर तक हुई थी। प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही ये गांधीजी के विचारों से बहुत प्रभावित हुए तथा इन्होने बचपन से ही प्रजा मंडल तथा चरखा संघ के माध्यम से स्वंत्रतता आन्दोलन में भाग लेना शुरू कर दिया।

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