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क्या विश्व हिंदी दिवस की वास्तव में कोई उपयोगिता है?

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सम्पूर्ण विश्व में 10 जनवरी को तेरहवाँ विश्व हिंदी दिवस (वर्ल्ड हिंदी डे) मनाया जा रहा है परन्तु यह भी एक विडम्बना ही है कि इसे भी विश्व हिंदी दिवस की जगह वर्ल्ड हिंदी डे के रूप में ही प्रचारित किया जा रहा है। कम से कम इस दिन सभी लोगों को पूर्णरूपेण हिंदी भाषा का प्रयोग कर लेना चाहिए। यह दिवस सम्पूर्ण विश्व में हिंदी भाषा को प्रचारित करने के लिए मनाया जाता है।

क्या आप जानते हैं कि पूरे देश में हर वर्ष 10 जनवरी को ही विश्व हिन्दी दिवस (वर्ल्ड हिंदी डे) क्यों मनाया जाता है? क्या आपके मन में कभी यह प्रश्न नहीं उठता है कि हमारे देश में भी ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि हमें भी विश्व हिंदी दिवस मनाना पड़ रहा है?

दरअसल हमारे देश में हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा प्राप्त करने में बहुत से विरोधों तथा संघर्षों का सामना करने के साथ-साथ बहुत लम्बा समय लगा है। हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ देश है जहाँ पर हर पचास-साठ किलोमीटर की दूरी पर भाषा के साथ-साथ संस्कृति में भी परिवर्तन देखने को मिलता है।

हमारे देश में स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही एक देश एक भाषा की मांग उठती रही है। इसी वजह से भारत के विभिन्न प्रान्तों के नेताओं ने भी सभी भाषाओँ में हिंदी भाषा को ही देश की संपर्क भाषा बनने के योग्य समझा था क्योंकि यह भाषा उत्तर भारत तथा पश्चिमी भारत के लगभग सभी राज्यों में भलीभाँति बोली और समझी जाती थी।

इस भाषा के साथ सिर्फ एक ही परेशानी थी कि यह दक्षिण भारत तथा पूर्वोत्तर के राज्यों में ना तो बोली जाती थी और ना ही समझी जाती थी। इसलिए उस वक्त यह निश्चित किया गया कि जब यह भाषा पूरे देश में आम सहमती के साथ स्वीकार कर ली जाएगी तब इसे राजभाषा घोषित कर दिया जाएगा।

आजाद भारत के लिए वर्ष 1946 में जब संविधान सभा का गठन हुआ तब उसके समक्ष नए राष्ट्र के लिए संविधान के साथ-साथ आधिकारिक जनसंपर्क की भाषा का चुनाव भी प्रमुख मुद्दा था। संविधान सभा में बहुत विचार विमर्श हुआ तथा 14 सितम्बर 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा को अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ भारत की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया गया।

बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने इस ऐतिहासिक दिन को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया जिसके परिणामस्वरूप पहला आधिकारिक हिन्दी दिवस 14 सितंबर 1953 के दिन मनाया गया।

वैसे दुनिया में शायद ही और कोई दूसरा देश ऐसा होगा जिसे अपनी राजभाषा को प्रोत्साहित करने की जरूरत पड्ती हो। दुनिया में शायद ही किसी अन्य देश में उसकी राजभाषा को सौतेले व्यवहार को भोगना पड़ रहा होगा। भारत में कहने को तो प्रतिवर्ष हिंदी दिवस आता है परन्तु यह दिवस सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों द्वारा औपचारिक बनकर रह जाता है।

असल में हालात यह है कि हिंदी भाषी व्यक्ति को अल्प शिक्षित तथा पिछड़ा हुआ व्यक्ति समझा जाता है तथा अंग्रेजी बोलने और समझने वाले को शिक्षित तथा आधुनिक व्यक्ति समझा जाता है। हिंदी माध्यम के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक रह गई है तथा हर कोई अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में दाखिल करवाना पसंद कर रहा है। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार अंग्रेजी माध्यम के बहुत से विद्यालयों में तो यह आलम है कि यहाँ पर बच्चों के हिंदी बोलने पर उनसे जुर्माना भी वसूला जाता है।

हम सभी लार्ड मैकाले का सपना पूरा कर रहे हैं जिसके अनुसार हम सभी शक्ल तथा चमड़ी से तो भारतीय नजर आते हैं परन्तु मानसिक रूप से हम अभी भी अंग्रेजों के गुलाम ही हैं। अंग्रेजों को भारत छोड़े सत्तर वर्ष हो गए हैं परन्तु हमारी मानसिक गुलामी आज तक हमारे मष्तिष्क से नहीं गई है। हम अंग्रेजी में बात करने पर गर्व महसूस करते हैं तथा हिंदी में बात करने वाले को हेय दृष्टि से देखते हैं।

जब हम अपने देश में ही हिंदी भाषा को उपयुक्त सम्मान नहीं दे पा रहे हैं तो फिर हम विश्व के अन्य देशों से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वहाँ हिंदी को यथोचित सम्मान मिले। तमाम उपेक्षाओं के बावजूद हिंदी भाषा अपने दम पर आगे बढती जा रही है। दरअसल हिंदी भाषा में आदर, सम्मान, भावनाएँ, अभिव्यक्ति को प्रकट करने की जो कहंता है वह विश्व की अन्य किसी भी भाषा में नहीं है। हिंदी भाषा के शब्दों से हमें बोलने वाले की भावनाओं का सुस्पष्ट पता चल जाता है परन्तु यह आभास अंग्रेजी भाषा में कदापि नहीं होता है।

हमें दुनिया में फिजी देश से कुछ सीखना चाहिए जो पूर्णरूपें भारतीय न होकर भी भारतीय परम्पराओं को निभा रहे हैं। यहाँ हिंदी भाषी लोगों को हेय दृष्टि से नहीं देखा जाता है बल्कि हिंदी को यहाँ की आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। यहाँ हिंदी में बातचीत को “फिजी बात” कहा जाता है।

जब तक उपरोक्त कारण हमारे समाज में रहेंगे तब तक हिंदी भाषा को इसका गौरव दिलाना मात्र दिवास्वप्न ही साबित होगा। अतः हमें हिंदी भाषा को भारत का गौरव बनाने के लिए ईमानदारी के साथ धरातल पर रहकर निरंतर प्रयास करना होगा। हमें यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि मात्र एक दिन के लिए हिंदी प्रेम प्रकट करने से इस भाषा का कतई भला नहीं हो सकता है।

क्या विश्व हिंदी दिवस की वास्तव में कोई उपयोगिता है?
Is World Hindi Day really useful?

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