मौर्य युग के पश्चात पुनः अखंड हुआ है भारत - कश्मीर में धारा 370 के हटाने की घोषणा के साथ ही आज का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. आज के दिन मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त तथा उनके गुरु आचार्य चाणक्य की यकायक याद आ गई जिन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक अखंड भारतवर्ष की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाए थे.

आचार्य चाणक्य की माँ भारती की परिकल्पना को सम्राट अशोक ने पूर्णतः साकार किया तथा अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों तक भारत को एक सूत्र में बाँधा. सम्राट अशोक के साम्राज्य में अखंड भारतवर्ष बना परन्तु उसके पश्चात कई विदेशी आक्रान्ताओं के आक्रमण को सहकर भी यह इतना खंडित नहीं हुआ था जितना इसे मध्ययुग में मुस्लिम आक्रान्ताओं ने कर दिया था.

कश्मीर की सभ्यता और संस्कृति लगभग 6000 वर्ष पुरानी है. कश्मीर का नामकरण ही कश्यप ऋषि के नाम पर हुआ है. कश्मीर के मूल निवासी सारे हिन्दू थे जिन्हें कश्मीरी पंडित के नाम से जाना जाता है. 14वीं शताब्दी में तुर्किस्तान से आए एक क्रूर मंगोल मुस्लिम आक्रमणकारी दुलुचा ने अपनी सेना के साथ कश्मीर पर आक्रमण किया और मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना की.

इसने हजारों हिन्दुओं का नरसंहार किया और कश्मीर में जबरन हिन्दुओं का धर्मान्तरण करवाया. आज वो ही धर्मान्तरित हिन्दू अपने मूल देश तथा धर्म को भूलकर अपने ही देश तथा अपने ही लोगों का विरोध करते हैं.

हमें यह समझना होगा कि मुस्लिम आक्रमण से पूर्व कश्मीर में मुस्लिम धर्म का कोई नामोनिशान नहीं था. कश्मीर ही क्या सम्पूर्ण भारतवर्ष में मुस्लिम जनसँख्या ना के बराबर थी. हिन्दुओं के जबरन धर्म परिवर्तन से ही भारतवर्ष में मुस्लिम धर्म का प्रसार होने के साथ-साथ इनकी जनसँख्या बढ़ी.

मौर्य युग के पश्चात पुनः अखंड हुआ है भारत

मुस्लिम आक्रान्ता तो लुटेरे मात्र थे जो भारत को लूटने के लिए आए थे. इनमे से अधिकतर ने भारत को लूटा और वापस चले गए और कुछ जैसे अफगान और सारे मुगल यहीं बस गए. इन्होंने हिन्दुओं से जबरन धर्म परिवर्तन करवाया. इन धर्म परिवर्तित लोगों में से अधिकतर ने अपने इतिहास और विरासत को भुलाकर अपने आप को उन आक्रान्ताओं का वारिस ही समझ लिया. इन्होंने अपनी सभ्यता और संस्कृति को मात्र फारस से ही जोड़कर देखना शुरू कर दिया.

इन्होंने ये भी भुला दिया कि कभी इनके पूर्वज भी उसी धर्म को मानते थे जिसका ये विरोध करते हैं. जबकि सत्य यह है कि वैदिक काल से ही भारत आर्यों का देश रहा है जिसमे सनातन धर्म के अतिरिक्त अन्य किसी धर्म का स्थान नहीं था. कथित रूप से कश्मीर की मुस्लिम आबादी के पाकिस्तान प्रेम की वजह से धीरे-धीरे भारत का ताज कश्मीर एक समस्या बन गया. यह समस्या कश्मीर के साथ-साथ भारत के विकास में भी काफी बाधा बनने लग गई.

कश्मीर भारत का अंग होने के पश्चात भी वास्तविक रूप से उस अंग की तरह नहीं रहा जिस तरह से भारत के अन्य राज्य हैं. कश्मीर भारत का ऐसा अंग रहा है जहाँ ना तो भारत का संविधान लागू था और ना ही भारत का झन्डा.

नरेन्द्र मोदी बन रहे हैं भारत के सिकंदर

धारा 370 ने आग में घी का काम किया जिसके तहत इसे विशेष राज्य का दर्जा दिया गया. अलगाव तथा आजादी की मांग एवं आतंकवादी घटनाओं की वजह से भारत का हजारों करोड़ रूपया सिर्फ आतंकवादी गतिविधियों से निपटने में ही खर्च हो जाता है.

आजादी के पश्चात सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारत को पुनः एकता के सूत्र में पिरोया परन्तु बहुत से राजनीतिक कारणों से कश्मीर में हिन्दू शासक होने के पश्चात भी यह भारत का अभिन्न अंग नहीं बन पाया.

धारा 370 की समाप्ति के साथ-साथ कश्मीर की समस्या का समाधान भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख एजेंडा रहा है. अपने इस एजेंडा को मूर्त रूप देकर कश्मीर की इस समस्या को जड़ से समाप्त करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी ने कार्य किया है.

जिस प्रकार सम्राट चन्द्रगुप्त और चाणक्य की जोड़ी ने कश्मीर सहित सम्पूर्ण भारत वर्ष को एकता के सूत्र में बाँधकर अखंड बना दिया था ठीक उसी प्रकार आज मोदी और शाह की जोड़ी ने भी कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर इसे भारत का अभिन्न अंग बना दिया है.

मैनेजमेंट का बेहतरीन उदाहरण है मोदी और शाह की रणनीति

आज सही मायनों में कश्मीर भारत का अंग बना है. अब यहाँ भारत का संविधान लागू होगा, भारत का झंडा तिरंगा सम्पूर्ण कश्मीर घाटी में लहलहाएगा. प्रत्येक भारतवासी निर्भीक रूप से कश्मीर में विचरण कर पायेगा.

आज का दिन कश्मीरी पंडितों के लिए भी बड़ी खुशी का दिन है जिन्हें कश्मीरियों की नफरत और अत्याचार की वजह से अपने घर को छोड़कर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ा. ये कहाँ का इन्साफ था कि कश्मीर से कश्मीर के मूल निवासियों को ही बेदखल कर दिया गया.

मोदी शाह की जोड़ी के लिए यह कदम उठाना बड़ा मुश्किल था परन्तु भारत की जनता ने मोदी को पुनः पूर्ण बहुमत देकर इस कार्य के लिए प्रेरित किया. तभी तो इस बार चुनाव में विजय प्राप्त करते ही इन्होंने सबसे पहले कश्मीर की समस्या को हमेशा-हमेशा के लिए निपटा दिया.

धारा 370 हटाने की घोषणा होते ही बहुत से मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों का पालन करने वाले राजनीतिक दलों में हाय तौबा मच गई और वे घोर विरोध पर उतर आए. इन दलों की अगुवा रही कांग्रेस पार्टी. कथित रूप से कश्मीर की सारी समस्या ही कांग्रेस पार्टी की खड़ी की हुई है. अगर कांग्रेस चाहती तो अपने लगभग पचास वर्षों के शासनकाल में इस समस्या से निजात पा सकती थी परन्तु इसने ऐसा नहीं किया.

अब जब मोदी सरकार ने इस समस्या को जड़ से समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया तो नेतृत्वविहीन कांग्रेस पार्टी घोर विरोध पर उतर आई. इन्हें अपना राजनितिक मुद्दा समाप्त होता नजर आया.

कांग्रेस को अपनी राजनीतिक समझ को निखारना होगा तथा यह समझना होगा कि कश्मीर सिर्फ उन कश्मीरियों का ही नहीं है जो आज वहाँ पर रहते हैं बल्कि यह उन हिन्दुओं का भी है जिन्हें वहाँ से जबरन निकाल दिया गया था, यह उन हिन्दुओं का भी है जो भारतवासी हैं, यह उन हिन्दुओं का भी है जिनकी कश्यप ऋषि के साथ -साथ सनातन धर्म में आस्था है.

मोदी है तो मुमकिन है

किसी के घर में जबरन कब्जा करके बैठने से वह घर उसका नहीं हो जाता जिसने कब्जा किया हुआ है. कश्मीरी मुसलमानों को भारत के अन्य प्रान्तों के मुसलमानों से प्रेरणा लेनी चाहिए जो कभी अलगाव की बात नहीं करते. हाँ, अपने निजी तथा राजनीतिक हितों के तहत अपवाद स्वरुप कुछ उदहारण हो सकते हैं. परन्तु ये नगण्य से ही हैं.

ऐसा नहीं है कि सभी कश्मीरी मुसलमान भारत के खिलाफ हैं. बहुत से पढ़े लिखे मुसलमान वास्तविकता को समझते हैं तथा भारत को अपना वतन मानते हैं एवं इसके लिए अपनी जान भी कुर्बान करते हैं. कश्मीर के मूल निवासी तथा भारतीय सेना के शहीद औरंगजेब इसके एक उदहारण हैं जिन्होंने आतंकवादियों के आगे ना झुकते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी. इनके दो भाई भी उदहारण है जिन्होंने कुछ समय पहले ही भारतीय सेना को ज्वाइन किया.

दरअसल धर्म राजनीति करने का एक जरिया बन गया है जिसे बहुत से नेता भुनाते हैं. जब जनता अधिक शिक्षित नहीं होती तब यह और आसान हो जाता है. कश्मीर में भी काफी कुछ ऐसा ही हो रहा है. भारत को पुनः अखंड भारतवर्ष बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार को तहे दिल से बधाई.

मौर्य युग के पश्चात पुनः अखंड हुआ है भारत India has become intact again after Mauryan era

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