विज्ञान विषय में करियर आप्शन तथा रोजगार की संभावनाएँ

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साइंस स्ट्रीम से बारहवीं करने के पश्चात अधिकतर विद्यार्थियों का प्रमुख उद्देश्य डॉक्टर या इंजीनियर बनना होता है। दूसरी तरफ इनके अलावा कुछ ऐसे भी विद्यार्थी होते हैं जो डॉक्टर, इंजीनियर ना बनकर कुछ और ही बनना चाहते हैं परन्तु किसी अन्य विकल्प के बारे में पर्याप्त ज्ञान नहीं होने की वजह से उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आता है तथा वे अपने भविष्य को लेकिन चिंतित तथा भ्रमित रहते हैं।

साइंस बहुत व्यापक विषय है जिसकी अनेक शाखाएँ हैं तथा इसमें अच्छे करियर के लिए एक या दो नहीं बल्कि ढेरों विकल्प मौजूद हैं। सही समय पर सही विकल्प का चुनाव ही सफल करियर की बुनियाद होता है अतः इस लेख के माध्यम से सभी विद्यार्थी साइंस विषय के द्वारा खुलने वाले अनेक विकल्पों से परिचित होंगे जिनकी वजह से उन्हें अपने करियर को नई बुलंदियों पर ले जाने का मौका मिलेगा।

माइक्रो-बायोलॉजी – माइक्रो-बायोलॉजी लाइफ साइंस का महत्वपूर्ण विषय है जो कि मुख्यतया जीवन विज्ञान से सम्बंधित होता है। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए न्यूनतम बीएससी इन माइक्रो-बायोलॉजी कोर्स करना होता है। यह कोर्स पूर्ण करने के पश्चात मास्टर डिग्री और पीएचडी का विकल्प भी खुला रहता है।

बायोकेमिस्ट्री - बायोकेमिस्ट्री क्षेत्र में प्रवेश के लिए बीएससी इन बायोकेमिस्ट्री कोर्स कर सकते हैं। इसको करने के पश्चात मास्टर डिग्री और पीएचडी का विकल्प भी खुला रहता है।

स्पेस साइंस - यह अन्तरिक्ष विज्ञान से सम्बंधित बहुत विस्तृत क्षेत्र है। इसके अंतर्गत एस्ट्रोनॉमी, कॉस्मोलॉजी, स्टेलर साइंस, प्लैनेटरी साइंस जैसे कई विषय आते हैं। इसरो और बेंगलुरु स्थित आईआईएससी में इस क्षेत्र से सम्बंधित तीन साल की बीएससी और चार साल के बीटेक से लेकर पीएचडी तक के कोर्सेज विशेष तौर पर करवाए जाते हैं।

नैनो-टेक्नोलॉजी - ग्लोबल इनफार्मेशन इंक की ताजा रिसर्च के अनुसार नैनो टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के वर्ष 2018 तक 3.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद की गई है। अगर वास्तव यह सच होता है तो इस क्षेत्र में बहुत से ट्रेंड प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी जो कि अनुमानित रूप से लगभग 11 लाख के आस पास होंगे। इस क्षेत्र में बहुत अच्छा करियर बनाने के लिए बारहवीं के बाद नैनो टेक्नो लॉजी में बीटेक या बीएससी और उसके बाद इसी सब्जेक्ट में एमटेक या एमएससी की जा सकती है।

एस्ट्रोफिजिक्स – जिन विद्यार्थियों की रूचि अन्तरिक्ष, सितारों और आकाश गंगाओं आदि में होती है वे विद्यार्थी बारहवीं के बाद एस्ट्रो-फिजिक्स में अपना करियर बना सकते हैं। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए पाँच साल के रिसर्च ओरिएंटेड प्रोग्राम (एमएस इन फिजिकल साइंस) या फिर तीन साल के बैचलर प्रोग्राम (बीएससी इन फिजिक्स) में प्रवेश लिया जा सकता है। एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी करने के बाद विद्यार्थियों के लिए इसरो जैसे रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन में साइंटिस्ट बनने के रास्ते खुल सकते हैं।

वॉटर साइंस - यह पानी से जुड़ा हुआ विज्ञान होता है जिसमे हाइड्रोजियोलॉजी, हाइड्रोमिटियोरोलॉजी, ड्रेनेज बेसिन मैनेजमेंट, वॉटर क्वॉलिटी मैनेजमेंट, हाइड्रोइंफॉर्मेटिक्स जैसे विषयों की पढ़ाई गहनता से करवाई जाती है। बाढ़ और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के असमय बढ़ने की वजह से इस क्षेत्र में शोधार्थियों की मांग बहुत तीव्रता से बढ़ रही है।

एनवायर्नमेंटल साइंस – यह क्षेत्र इंसानी गतिविधियों द्वारा पर्यावरण पर होने वाले असर के अध्ययन से सम्बंधित है। इस क्षेत्र को भली भाँती समझने के लिए इसमें इकोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, पॉल्यूशन कंट्रोल जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। उपरोक्त सभी विषयों में एनजीओ तथा यूएनओ के प्रोजेक्ट्स की बहुत तीव्रता से वृद्धि तथा भागीदारी होने के कारण यह क्षेत्र रोजगार की प्रबल संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है।

रोबोटिक साइंस – यह क्षेत्र बहुत तेजी से प्रसिद्ध हो रहा है जिसका इस्तेमाल अमूमन सभी जगह होना शुरू हो गया है जैसे कार असेम्बलिंग, लैंडमाइंस, हार्ट सर्जरी आदि। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए इससे जुड़े हुए कुछ विशेष तथा प्रमुख कोर्स किए जा सकते हैं जैसे रोबोटिक्स, ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड रोबोटिक्स सिस्टम आदि। कम्प्यूटर साइंस में बैचलर डिग्री कर चुके विद्यार्थी इस कोर्स के लिए पात्र माने जाते हैं। रोबोटिक साइंस में मास्टर डिग्री करने के पश्चात विद्यार्थियों को इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में शोध कार्य करने से सम्बंधित नौकरी मिल सकती है।

डेयरी साइंस – विश्व में भारत डेयरी प्रोडक्शन में अमेरिका के पश्चात दूसरे नंबर पर आता है। डेयरी साइंस कोर्स के द्वारा विद्यार्थियों को दूध से सम्बंधित सभी तरह की जानकारियाँ जैसे मिल्क प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूशन आदि दी जाती है। हमारे देश में दूध की बढ़ती हुई खपत को देखते हुए इस क्षेत्र में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ने लगी है। चार वर्षीय डेयरी टेक्नोलॉजी के स्नातक स्तरीय कोर्स में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों को साइंस सब्जेक्ट से बारहवीं करने के बाद राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर आयोजित एंट्रेंस एग्जाम को पास करना होता है।

साइंस में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए उपरोक्त सभी विकल्पों के अतिरिक्त फार्मेसी, नर्सिंग, अल्टरनेटिव मेडिसिन्स तथा पैरामेडिकल, मरीन बायोलॉजी, बिहेवियरल साइंस, फिशरीज साइंस आदि जैसे कई विकल्प और भी मौजूद होते हैं।

विज्ञान विषय में करियर आप्शन तथा रोजगार की संभावनाएँ
Career options and job prospects in science

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