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दसवीं कक्षा के पश्चात करियर के विकल्प

Career
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मैट्रिकुलेशन यानी दसवीं कक्षा सभी विद्यार्थियों के करियर का आधार स्तंभ होती है तथा दसवीं कक्षा के परिणाम के आते ही छात्रों तथा उनके माता पिता के मन में उत्पन्न होने वाला सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही होता है कि अब दसवीं के बाद क्या करें? दसवीं के पश्चात विकल्प के रूप में बहुत से विषयक्षेत्र जैसे वाणिज्य, विज्ञान, कला, डिप्लोमा तथा आईटीआई आदि होते हैं जिनमें से किसी एक का चुनाव करना होता है।

विद्यार्थियों के लिए दसवीं कक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी कक्षा के पश्चात विद्यार्थियों को अपने करियर के लिए उपयुक्त रास्तों का चुनाव करना पड़ता है। दसवीं के पश्चात छात्रों के लिये आगे अध्ययन तथा बेहतर रोजगार के अनेक अवसर मौजूद होते हैं परन्तु सबसे बड़ी दुविधा उन अवसरों को पहचानकर उन्हें पकड़ना है।

दसवीं के पश्चात सही विषय का चुनाव करना जीवन के सबसे बड़े निर्णयों में से एक होता है क्योंकि यह एक निर्णय हमारे भविष्य की दशा तथा दिशा तय करता है। हमें सर्वाधिक उपयुक्त दिशा का चुनाव करना है क्योंकि एक सही निर्णय हमें उन्नति के शिखर पर ले जा सकता है तथा एक गलत निर्णय हमें अवनति के गर्त की तरफ धकेल सकता है। परिजनों द्वारा जाने अनजाने में बनता गया दबाव तथा क्षमता से अधिक बढ़ी हुई अपेक्षाओं के कारण मस्तिष्क में हमेशा दुविधा बनी रहती है परन्तु हमें इन सभी बातों से अप्रभावित रहकर निर्णय लेते समय अपनी पसंद, अभिरुचि, विषय की क्लिष्टता तथा चुने जाने वाले विषय में उपलब्ध रोजगार के अवसरों को विषय के चयन के लिए प्राथमिकता देनी चाहिए।

दसवीं में प्राप्त मार्क्स को विषय के चयन के लिए कुछ प्राथमिकता देनी चाहिए परन्तु एक बात हमें अवश्य अपने दिमाग में रखनी चाहिए कि किसी भी परीक्षा में प्राप्त मार्क्स हमारी मेहनत तथा विषय पर हमारी पकड़ को दर्शा सकते हैं परन्तु फिर भी उस विषय के चयन का प्रमुख आधार नहीं हो सकते हैं। विषय चयन में मार्क्स का महत्त्व सिर्फ और सिर्फ एक सहायक कारक के रूप में ही हो सकता है यह कभी भी सर्वप्रमुख नहीं होना चाहिए।

हमें दसवीं के पश्चात अपने लिए विषय चुनते समय विभिन्न कारकों जैसे अभिरुचि और रूचि, उपलब्ध विषयों के बारे में गहरा ज्ञान तथा चुने जाने वाले विषय में उपलब्ध या संभावित रोजगार के अवसरों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।

विषय चुनने के लिए सबसे पहला कारक हमारी अभिरुचि तथा रूचि होती है। हमें यह अच्छी तरह से पता होना चाहिए कि हमारी रूचि किस विषय में ज्यादा है तथा हम किस विषय को पढ़ने में रुचिकर महसूस करते हैं। यह सर्वविदित है कि रुचिकर विषय को पढ़ने से अध्ययन बहुत आनंददायक बन जाता है तथा विषय के प्रति लगाव भी बढ़ता है। अरुचिकर विषय को या तो पढ़ने का मन ही नहीं करता है और अगर हम उसे अनिच्छा से पढ़ते भी हैं तो उससे बहुत जल्दी ऊब जाते हैं तथा इसे पढ़ना केवल हमारी मजबूरी को ही प्रकट करता है। किसी विद्यार्थी की रूचि मेडिकल के क्षेत्र में है तो उसके लिए विज्ञान विषय ही उपयुक्त होता है परन्तु अगर ऐसे विद्यार्थी को कॉमर्स विषय पढ़ाया गया तो निश्चित रूप से वह उसमे असफल हो जाएगा।

विषय चुनाव का दूसरा प्रमुख कारक उपलब्ध विषयों के बारे में विस्तृत तथा गहन जानकारी होनी अत्यावश्यक है। हमें विकल्प के रूप में उपलब्ध सभी विषयों के बारे में विस्तृत रूप से यह पता होना चाहिए कि उन विषयों की कठिनता का स्तर क्या है? कई विषय दिखने में बहुत ही आसान से प्रतीत होते हैं परन्तु जब हम उन्हें पढ़ना शुरू करते हैं तब हमें उनकी कठिनता का अनुभव होता है। कठिनता के अतिरिक्त विषय के सम्बन्ध में यह भी तौल लेना चाहिए कि वह भविष्य में हमारे लिए कितना उपयोगी हो सकता है। अतः सही विषय का चुनाव करने के लिए विषय का गहरा ज्ञान बहुत जरूरी होता है।

विषय चुनाव का तीसरा प्रमुख कारक उस विषय में उपलब्ध रोजगार की सम्भावना का होना होता है। हमें उस विषय को चुनना चाहिए जो रुचिकर होने के साथ-साथ रोजगार के भरपूर अवसर भी उपलब्ध करवाता हो। ऐसे विषय को पढ़ने का कोई फायदा नहीं है जिसमे रोजगार के समुचित अवसर नहीं हों। हमें उस विषय को प्राथमिकता देनी चाहिए जिसमे सरकारी, निजी तथा स्वरोजगार तीनों क्षेत्रों के लिए अवसर मौजूद हों ना कि केवल किसी एक क्षेत्र विशेष के लिए। अधिक क्षेत्रों मंन रोजगार के अवसर हमारे लिए बहुत से विकल्प पैदा करते हैं तथा हम अपनी पसंद के क्षेत्र का चयन बड़ी आसानी से कर सकते हैं।

अतः विषय का चुनाव करते समय उपरोक्त सभी कारकों को सम्मिलित करके उनका पूर्ण रूप से विश्लेषण कर बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेना चाहिए।

दसवीं कक्षा के पश्चात करियर के विकल्प
Career option after class tenth

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