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साइंस स्ट्रीम से बारहवीं करने के पश्चात अधिकतर विद्यार्थियों का प्रमुख उद्देश्य डॉक्टर या इंजीनियर बनना होता है। दूसरी तरफ इनके अलावा कुछ ऐसे भी विद्यार्थी होते हैं जो डॉक्टर, इंजीनियर ना बनकर कुछ और ही बनना चाहते हैं परन्तु किसी अन्य विकल्प के बारे में पर्याप्त ज्ञान नहीं होने की वजह से उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आता है तथा वे अपने भविष्य को लेकिन चिंतित तथा भ्रमित रहते हैं।

मैट्रिकुलेशन यानी दसवीं कक्षा सभी विद्यार्थियों के करियर का आधार स्तंभ होती है तथा दसवीं कक्षा के परिणाम के आते ही छात्रों तथा उनके माता पिता के मन में उत्पन्न होने वाला सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही होता है कि अब दसवीं के बाद क्या करें? दसवीं के पश्चात विकल्प के रूप में बहुत से विषयक्षेत्र जैसे वाणिज्य, विज्ञान, कला, डिप्लोमा तथा आईटीआई आदि होते हैं जिनमें से किसी एक का चुनाव करना होता है।

देश के कुल हेल्थ केयर वर्कफोर्स का लगभग 30 प्रतिशत से ऊपर हिस्सा नर्सिंग प्रोफेशनल्स का है। इंडियन नर्सिंग कौंसिल के अनुसार देश में रजिस्टर्ड नर्सिंग प्रोफेशनल्स की संख्या लगभग 20 लाख से अधिक है तथा हमें अन्तराष्ट्रीय मापदंडों को पूर्ण करने के लिए लगभग 15 लाख नर्सिंग प्रोफेशनल्स की और अधिक आवश्यकता है।

दवाइयों के अंधाधुंध प्रयोग तथा बिगड़ती हुई जीवन शैली के कारण रोज नई-नई बीमारियाँ सामने आ रही हैं। नित नई बीमारियों का इलाज ढूँढने के लिए सरकार तथा प्राइवेट कंपनियों को अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है तथा रिसर्च पर बहुत सा धन खर्च हो रहा है। धीरे-धीरे दवाइयाँ लोगों के जीवन का अहम् हिस्सा बनती जा रही हैं। इसी कारण से पूरी दुनिया में दवाओं का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

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