big dreams

कुछ लोग सपने बड़े संजोते है - इस कविता में अपने इच्छित सपने पूरे नहीं होने पर मन में जिस प्रकार के भाव पैदा होते हैं उन्हें रेखांकित किया गया है.

कुछ लोग सपने बड़े संजोते है
फिर मैयत उनकी ढोते हैं
सबके व्यंगबाण सहते हैं
लेकिन चुप ही रहते हैं

सबको मनमौजी दिखते हैं
प्रेम की कौड़ी में बिकते हैं
सनकी भी समझे जाते हैं
दिल ही दिल में सब पी जाते हैं

गम को गले लगाते हैं
तनहाई मे आँसू बहाते हैं
ईश्वर से ये कहते हैं
हम धरती पर क्यों रहते हैं

क्यों सब हमको ठुकराते हैं
क्यों गले नहीं लगाते हैं
क्यों उपेक्षित से रह जाते हैं
क्यों प्यार नहीं हम पाते हैं

सपने दिन रात सताते हैं
अकेलेपन को गले लगाते हैं
जिससे भी बतियाते हैं
वो समझ हमें नहीं पाते हैं

कहने को सब का साथ है
सर पे सभी का हाथ है
फिर ऐसी क्या बात है
जो हर रात अमावस की रात है

जिस काम में भी हाथ डालते हैं
उस काम का जनाजा निकालते हैं
मेहनत पूरी करते हैं
पर केवल हाथ मलते हैं

असफल होना कर्मो का फल लगता है
शायद, इसलिए कुछ भी नहीं फलता है
मन घुट घुट कर, तिल तिल कर, मरता है
पर जाने किस उम्मीद में जीवन चलता है

अब जीवन का वो मुकाम आ गया
जहाँ लोगों के जीवन में खुशी है
पर हम जैसों के जीवन में
आज भी छाई खामोशी है

बढ़ती खामोशी धीरे धीरे नकारात्मकता लाती है
अब जीवन किस काम का, यही बात बतलाती है
त्याग दे ये असफल जीवन, छोड़ दे सभी सुनहरे सपने
बारम्बार आँखों के सामने घूम जाते हैं कुछ चेहरे अपने

इन चेहरों की अश्रुपूरित कातर नजरे डोलती है
टकटकी लगाकर डबडबाई आँखे ये बोलती है
तुम्हारे बाद हमारा क्या होगा, हम कैसे जी पाएँगे
दुनिया बड़ी बेरहम है, क्या हम सुखी रह पाएँगे

ये चेहरे ही जीवन बचाते हैं
मरे हुए आत्मविश्वास को फिर से जगाते हैं
उम्मीद की सुनहरी किरण फिर से दिखाते हैं
नाउम्मीदी के अंधकार में जीवन का लक्ष्य बताते है

जीवन पर हमारा हक नहीं, यह ईश्वर की नैमत है
इसका चलते रहना ही खुदा की इबादत है
जिस दिन इस इबादत का अंत अपने आप होगा
केवल उस दिन ही आत्मा का परमात्मा से मिलाप होगा

सफलता, असफलता और भाग्य, उस ईश्वर के हाथों में है
बिना फल के कर्म करने का ज्ञान, हमेशा उसकी बातों में है
आज से जीवन को ईश्वर की अमानत समझकर जीना है
दुख रूपी जहर को, नीलकंठ बनकर खुशी खुशी पीना है

जीवन अनमोल है यह अब हमने ठान लिया
नियति को स्वीकार कर इसको अपना मान लिया
चाहे कुछ भी हो जाए फिर से नई शुरुआत करनी है
वह सुबह कभी तो आएगी, गम की रात भी ढलनी है

Written by:
Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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