आखिर इतने लोकप्रिय कैसे हैं नरेन्द्र मोदी - प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे अधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक हैं. ये आपदा को अवसर में बदलने का माद्दा रखते हैं.

शायद इसलिए ये जो भी कदम उठाते हैं उसमे इन्हें देश की जनता का भरपूर समर्थन मिलता है फिर चाहे वह अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए नोटबंदी हो या फिर कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए तालाबंदी.

प्रधानमंत्री के द्वारा सभी कदम सोच समझकर उठाये जाते हैं. सभी मुद्दों का पहले गहनता से अध्ययन होता है फिर उसका विश्लेषण होता है और तत्पश्चात उसे निडरता से लागू कर दिया जाता है.

अपने इसी निडर स्वाभाव की वजह से ही इन्हें 56 इंची सीने वाले व्यक्तित्व की संज्ञा दी जाती है. इन्होंने अपने निडर स्वभाव की वजह से कई ऐसे मुद्दों को चुटकियों में सुलझा दिया जिनका सुलझना असंभव प्रतीत होता था.

इन मुद्दों में सबसे बड़ा मुद्दा कश्मीर में धारा 370 और आर्टिकल 35 ए को लेकर था. प्रधानमंत्री की अगुवाई में जिस प्रकार यह मुद्दा सुलझा उसे देखकर लगा ही नहीं कि यह मुद्दा कभी इतना बड़ा भी था. एक झटके में कश्मीर से सम्बंधित समस्या समाप्त हो गई.

कश्मीर का मुद्दा और राम मंदिर का मुद्दा देश के सबसे बड़े मुद्दे थे जो देश की एकता, अखंडता के साथ-साथ आपसी भाईचारे के लिए बाधक बन रहे थे. कश्मीर में कई पाकिस्तान परस्त राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त निवासियों की वजह से पाकिस्तान को अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने में मदद मिलती रहती थी.

पाकिस्तान को अब इस प्रकार की मदद मिलना समाप्त हो जाएगी क्योंकि जब तक कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश रहेगा तब तक कश्मीर की प्रशासनिक एवं राजनीतिक व्यवस्था पर सम्पूर्ण नियंत्रण सीधे-सीधे प्रधानमंत्री मोदी के हाथों में होगा.

आखिर इतने लोकप्रिय कैसे हैं नरेन्द्र मोदी

धारा 370 और आर्टिकल 35 ए के हटने की घटना को हम कश्मीर के पुनर्जन्म के रूप में देख सकते हैं और उम्मीद करते हैं कि नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में ही कश्मीरी पंडितों को उनकी जन्मभूमि में वापस जाने का अवसर मिलेगा.

इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट में वर्षों लंबित अयोध्या की राम जन्म भूमि का मुद्दा भी बड़ी आसानी से निपट गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बावरी मस्जिद की जगह भगवान राम का भव्य मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया. जिस आसानी से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी पक्षों ने स्वीकार किया है वह भी मोदी की दूरदर्शी सोच का कमाल है.

मुझे ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को एक धर्म विशेष के प्रति अपनी तुष्टिकरण की नीति की वजह से कभी गंभीरता से ले ही नहीं पाई. वैसे इन मुद्दों का बने रहना भी तो हमेशा वोट बैंक के लिए फायदेमंद रहता है.

कोरोना महामारी के आने से पहले सीएए और एनआरसी का मुद्दा प्रमुखता से छाया हुआ था. मेरे विचार से किसी भी देश के नागरिकों के लिए नागरिकता का राष्ट्रीय रजिस्टर बनना गलत नहीं है. इस रजिस्टर की वजह से हमें भारत के नागरिक होने पर गर्व होगा.

नहीं तो भारत के मूल निवासियों और उन बांग्लादेशी नागरिकों में फर्क क्या है जो बॉर्डर पार करके भारत में निवास कर रहे हैं. राजनितिक लाभ के लिए सबके राशन कार्ड और आधार कार्ड भी बड़ी आसानी से बन चुके हैं.

आज जिस प्रकार से अमेरिका और अन्य यूरोपियन देशों की नागरिकता की एक विशेष अहमियत है उस प्रकार भारत की नागरिकता की अहमियत क्यों नहीं होनी चाहिए? आखिर जब भारत प्राचीन काल में विश्व गुरु था तो वर्तमान काल में क्यों नहीं बने?

एक मुद्दा जो आने वाले समय में प्रधानमंत्री मोदी की प्रमुखता में रहेगा वो है समान नागरिक संहिता. मेरे हिसाब से इस देश के लिए समान नागरिक संहिता बहुत जरूरी है ताकि इस देश के सभी नागरिक सही मायनों में समान हो फिर चाहे वो किसी भी धर्मं को मानने वाले हों.

जब हम एक धर्मनिरपेक्ष देश में रहते हैं तो हमारे नियम कायदों और कानून व्यवस्था में भी यह झलकना चाहिए. कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए फिर चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम.

मुझे लगता है कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में अब तक कई असंभव मुद्दों का समाधान हुआ है यह प्रक्रिया इसी प्रकार चलती रहेगी. हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भारत पुनः सोने की चिड़िया बने और सभी भारतवासी रामराज्य का सुख भोगें.

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