श्रीमाधोपुर के रोडवेज बस स्टैंड में प्रमुख समस्याएँ - श्रीमाधोपुर के प्रमुख मुद्दे नामक श्रंखला के दूसरे भाग में हम रोडवेज बस स्टैंड पर व्याप्त समस्याओं के बारे में चर्चा करेंगे.

नब्बे के दशक में श्रीमाधोपुर में रोडवेज बस डिपो बन गया था, परन्तु रोडवेज बस स्टैंड इसके बहुत वर्षों बाद में बन पाया. बस स्टैंड के लिए स्थान के चयन में राजनितिक मतभेद होने के कारण यह मामला लगभग डेढ़ दशक तक अटका रहा.

कभी रेलवे स्टेशन के पास जनाना हॉस्पिटल वाली जमीन पर, कभी बाईपास पर, तो कभी जालपाली में बस स्टैंड बनने के कयास लगने लगे थे.

आखिरकार, नगरपालिका भवन के बगल में पुलिस थाने वाली भूमि पर राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के केन्द्रीय बस स्टैंड का शुभारम्भ 21 दिसम्बर 2011 को तत्कालीन विधानसभाध्यक्ष एवं श्रीमाधोपुर के एमएलए दीपेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हुआ.

यह बस स्टैंड आमजन की सुविधाओं के लिए बना था, परन्तु धीरे-धीरे यह स्वयं ही कई प्रकार की अव्यवस्थाओं से ग्रसित हो गया. इन्ही अव्यवस्थाओं के चलते, एक बार वसुंधरा राजे के कार्य काल में तो श्रीमाधोपुर डिपो को बंद करने की भी अटकले लगी थी. बाद में जनभावनाओं को देखते हुए वसुंधरा राजे ने स्वयं डिपो को बंद नहीं करने के बाबत आश्वासन दिया था.

इस बस स्टैंड से बसों का संचालन दिन में तो ठीक है परन्तु रात्रि में नहीं है. रात्रि के लगभग 8 बजे बाद में यहाँ से जिला मुख्यालय सीकर, राजस्थान की राजधानी जयपुर और भारत की राजधानी दिल्ली के साथ-साथ कही भी जाने के लिए कोई बस सेवा नहीं है.

अंतिम बसों के रूप में रात्रि के पौने आठ बजे जयपुर और हरिद्वार के लिए ही बस सेवा है. रोडवेज प्रशासन को रात्रि के दस बजे तक तो जयपुर तथा सीकर के लिए बस सेवा रखनी चाहिए.

श्रीमाधोपुर के रोडवेज बस स्टैंड में प्रमुख समस्याएँ

अगर जयपुर या सीकर तक बस सेवा रखना संभव नहीं हो, तो कम से कम रींगस तक तो बस सेवा रखनी ही चाहिए ताकि यात्री भैरूजी मोड़ से अन्य वाहनों में बैठकर जयपुर या सीकर की तरफ यात्रा कर सकें.

अब हम इस बस स्टैंड से जुडी कुछ समस्याओं के सम्बन्ध में चर्चा करेंगे.

पहली समस्या, बस स्टैंड के अन्दर जगह की कमी होना है. यह बस स्टैंड आने जाने वाली बसों के हिसाब से काफी छोटा है. इसका क्षेत्रफल बड़ा होना चाहिए. जहाँ पर अभी नगरपालिका बनी हुई है, कम से कम इतनी जगह इस बस स्टैंड को और मिलनी चाहिए.

दूसरी समस्या, रोडवेज स्टैंड के गेट पर बाहर तथा अन्दर लगने वाला जाम है. गेट के बाहर लगने वाले जाम के तीन कारण है.

पहला कारण, गेट के बाहर सड़क की कम चौड़ाई होना, दूसरा कारण, इस कम चौड़ी सड़क पर भी चाट पकौड़ी के ठेलों का अस्थाई अतिक्रमण तथा तीसरा कारण, निजी वाहनों द्वारा सवारी के लिए गेट के सामने तथा अगल-बगल में अपने वाहन खड़ा करना.

इन सभी कारणों की वजह से बसों को बस स्टैंड के अन्दर आने तथा अन्दर से बाहर जाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है और नतीजन जाम लग जाता है.

अन्दर जाम लगने का प्रमुख कारण, निजी तथा टैक्सी वाहनों की जबरन तथा अवैध पार्किंग है. बस स्टैंड में जगह-जगह दीवारों पर नो पार्किंग के साथ-साथ जुर्माने की चेतावनी के बोर्ड लगे हुए हैं लेकिन फिर भी वाहन आवेश रूप से खड़े रहते हैं.

रोडवेज प्रशासन ने एक कर्मचारी अवैध पार्किंग को रोकने के लिए लगा रखा है, माइक से लगातार वाहन पार्क नहीं करने के लिए निवेदन किया जाता है परन्तु फिर लोग जबरन वाहन पार्क कर जाते हैं.

सबसे अधिक सोचने वाली बात यह है कि जहाँ पर लोग अपने वाहनों को अवैध रूप से पार्क करते हैं उस जगह के ठीक सामने पुलिस चौकी बनी हुई है. इस पुलिस चौकी पर अधिकतर समय ताला लटका रहता है.

बस स्टैंड के मुख्य द्वार के बाहर तथा अन्दर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कम से कम एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी की अत्यंत आवश्यकता है.

तीसरी समस्या, पार्किंग के लिए स्थान का अभाव है. रोडवेज बस स्टैंड पर वाहनों की अवैध पार्किंग गलत है, परन्तु यात्रियों के वाहन लिए वैध पार्किंग का होना भी आवश्यक है. वर्तमान में, बस स्टैंड में जगह की कमी की वजह से वैध पार्किंग के लिए भी शायद जगह नहीं है.

परन्तु फिर भी जब बस स्टैंड है तो पार्किंग के लिए जगह भी होना जरूरी है, इसलिए जितनी भी जगह उपलब्ध हो सकती है, उतनी जगह में यात्रियों के वाहनों को नियत समय के लिए पार्क करने हेतु, पार्किंग स्पेस को ठेके पर दिया जा सकता है.

जब पैसे देकर गाड़ी को पार्क करना पड़ेगा तो फिर हर कोई आकर अपनी गाडी को पार्क नहीं करेगा. वैसे भी पूरे श्रीमाधोपुर में वाहनों को पार्क करने की कोई जगह उपलब्ध नहीं है.

बस स्टैंड के बगल में नगरपालिका स्थित है परन्तु फिर भी यह, अन्दर तथा बाहर दोनों तरफ से वाहनों की शरण स्थली बनी हुई है. उस नगर पालिका से क्या उम्मीद की जाए जिसके खुद के गेट के दोनों तरफ वाहन खड़े रहते हैं. गेट की दीवार पर कई बार लोगों को लघुशंका करते हुए भी देखा जा सकता है.

चौथी समस्या, बस स्टैंड के गेट से लेकर अन्दर पूरे बस स्टैंड परिसर की सड़क का क्षतिग्रस्त होना है. कुछ समय पूर्व तक तो गेट पर एक बड़ी सी खुली नाली भी थी, जिसमे बस या किसी अन्य वाहन के टायर के फँसने की पूरी-पूरी सम्भावना बनी रहती थी.

अब वह नाली तो बंद हो गई परन्तु सडक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है. बारिश के मौसम में यहाँ पर पानी के भरने से कीचड़ ही कीचड़ हो जाता है. पैदल यात्रियों को अत्यधिक परेशानी भुगतनी पड़ती है.

उपरोक्त समस्याओं के निराकरण के पश्चात ही श्रीमाधोपुर के बस स्टैंड को सुविधाओं युक्त बस स्टैंड कहा जा सकता है.

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