silky hairs

सुंदरता में चार चाँद लगा देती है रेशमी जुल्फें - जुल्फों की तारीफ में पता नहीं क्या-क्या कहा गया है। जुल्फों का शरीर की सुन्दरता में अपना एक अलग स्थान है।

ये नारी सौन्दर्य का प्रमुख हिस्सा होती हैं जिसकी वजह से इनकी प्रशंसा में इन्हें भाँती-भाँती की उपमाएँ दी जाती है। युवा मन जब रूमानियत में डूबा रहता है तब उसके लिए इनका खास महत्त्व हो जाता है। दिल जुल्फों की तारीफ बरबस ही शब्दों के माध्यम से कर बैठता हैं।

जुल्फों को विभिन्न उपमाएँ दी जाती है जैसे काली घनी जुल्फें, नागिन सी लहराती जुल्फें, रेशमी जुल्फें, आदि। जुल्फों को जंजीर की भी उपमा दे दी जाती है क्योंकि प्रेमी अपने आप को इनमें जकड़ा हुआ महसूस करता है और इनके मोहपाश से मुक्त नहीं हो पाता है।

युवा मन अपने दिल के कहे अनुसार जुल्फों के लिए भिन्न-भिन्न उपमाएँ अपने आप तलाश कर लेता है। जब मन में किसी की चाहत का अहसास शुरू होता है तब उपमाएँ अपने आप जन्म लेना शुरू कर देती हैं और दिल में बहुत से शब्द अपने आप घर बनाने लगते हैं।

जुल्फों की तारीफ के लिए शब्दों का चयन अपने आप होने लगता है और ऐसा लगता है कि जैसे हर जवान दिल में शायरी जन्म लेने लग गई हो तब एक नए कवि या शायर का जन्म हो जाता है। प्रेमी अपनी प्रेमिका की सुन्दरता को प्रकट करने के लिए जो चंद शब्द उपयोग में लेता है उनमे से एक प्रमुख शब्द जुल्फ भी है।

स्त्री को गहनें बहुत पसंद होते हैं और प्रकृति ने उसे जुल्फों के रूप में नायाब गहना बक्शा है। जुल्फें नारी का प्राकृतिक गहना होती है जो नारी सौन्दर्य में चार चाँद लगा देती है।

जुल्फें जितनी लम्बी और घनी होती हैं वो उतनी ही ज्यादा मदहोश करने की क्षमता रखती है। जुल्फें जिस्म को मादक बना देती हैं और अगर ये बारिश की बूंदों में भीगी हुई हो तो मादकता अपने चरम पर होती हैं।

भीगी हुई जुल्फों से टपकती हुई पानी की बूंदे इस प्रकार प्रतीत होती है जैसे काले धागों में से मोती निकल-निकल कर नीचे गिर रहे हो। चेहरे पर छितरायी हुई बूंदों के साथ भीगी जुल्फें रुखसार को इतना मादक और मासूम बना देती है कि देखनें वाला अपने होश गवा सकता है।

काली और घनी जुल्फों का भी अलग महत्त्व होता है। जुल्फें जितनी काली होती है उनकी तुलना उतनी ही काली घटाओं के साथ होने लग जाती है और ऐसा प्रतीत होने लग जाता है कि जैसे इनमें कोई होड़ सी हो रही हो।

बारिश में जब तेज हवा चलती है और काली घनी जुल्फें इधर उधर लहराने लग जाती है तो यही अहसास देती है कि जैसे आसमान में घने काले आवारा बादल हवा के जोर से इधर उधर डोल रहे हैं।

कमर तक डोलती लम्बी जुल्फों को जब चोटी के रूप में बाँध दिया जाता है तब वह अक्सर नागिन का सा अहसास कराती है। मतवाली चाल के साथ जब चोटी इधर उधर लहराती है तो ऐसे लगता है जैसे कोई नागिन लहरा कर चल रही है।

शर्माते हुए चेहरे पर जब जुल्फें लटों के रूप में बिखरी होती है तब बला की खूबसूरती निखर कर आती है और लगता है जैसे कि कयामत आने वाली हो।

आजकल इन घनी और लम्बी जुल्फों के दर्शन कम होते जा रहें है और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभावस्वरूप जुल्फों की लम्बाई घटने लग गई है। अब जुल्फों के मदहोश कर देने वाले रूप बहुत कम देखने को मिलते हैं।

Written by:
Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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