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घर खरीदते समय ध्यान रखने योग्य जरुरी बातें - इंसान के जीवन के कुछ पूर्व निर्धारित लक्ष्य होते हैं जिन्हें वह अपने जीवन काल में ही प्राप्त कर लेना चाहता है और उन्हें पूरा करने के लिए जीवन भर भागदौड़ करता रहता है।

इंसान के कुछ मूलभूत लक्ष्य होते हैं जैसे बच्चों की पढ़ाई, उनके शादी-ब्याह तथा अपना खुद का घर। इन्ही लक्ष्यों को प्राप्त करते-करते इंसान की उम्र गुजर जाती है।

पिछले दशक तक हर इंसान अमूमन अपना घर अपने रिटायरमेंट की उम्र के आस पास तक ही बनाने की सोच पाता था परन्तु अब बदलते हुए वक्त ने इंसान के लिए रिटायरमेंट से बहुत पहले भी अपना घर बनाना बहुत आसान कर दिया है।

अब घर खरीदने के लिए ऋण बहुत आसानी से मिलने लगा है तथा घर बेचने वाली कंपनियाँ ही यह ऋण बहुत आसानी से उपलब्ध करवा देती है। ऋण लेकर घर खरीदते समय कई बातों का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी होता है जिनमे बजट, ईएमआई, ब्याज दर तथा घर का मकसद प्रमुख होता है।

घर खरीदने के लिए सबसे पहले हमें घर का बजट तय करना चाहिए। हमें घर अपनी हैसियत के अनुसार खरीदने की योजना बनानी चाहिए तथा अपनी हैसियत से ऊपर का घर नहीं खरीदना चाहिए। घर खरीदते समय अक्सर सभी लोग यह राय देते हैं कि घर जीवन में एक बार ही बनता है तथा उसे अच्छे से अच्छा बनाना चाहिए।

आपको यह ध्यान रखना है कि लोग तो सिर्फ और सिर्फ राय देंगे लेकिन महीने की ईएमआई सिर्फ और सिर्फ आपको चुकानी है अतः बगैर किसी की राय पर अधिक गौर फरमाए सिर्फ और सिर्फ अपने दिमाग और बजट के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए।

घर खरीदने के लिए जो ऋण मिलता है उसे होम लोन या फिर आवास ऋण कहा जाता है। ऋण लेने के पश्चात उसे चुकाने के लिए हर महीने किश्त भरनी होती है जिसे ईएमआई (Equated Monthly Installment) कहा जाता है जिसे हिंदी में सरल मासिक किश्त कहते हैं।

ईएमआई में मूलधन तथा ब्याज दोनों ही शामिल होते हैं अर्थात शुरुआती वर्षों में ब्याज अधिक तथा मूलधन कम तथा बाद के वर्षों में मूलधन अधिक तथा ब्याज कम होता है। यह तय की हुई एक निश्चित धनराशी होती है जिसके नियमित भुगतान से एक निश्चित समय में कर्ज की पूरी तरह से अदायगी हो जाती है।

हमें ऋण लेते समय ईएमआई की राशि अपनी सहूलियत के अनुसार इस प्रकार से तय करनी चाहिए कि जिसका हम आसानी से लगातार भुगतान कर सकें क्योंकि समय पर इसका भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त ब्याज के साथ–साथ भारी जुर्माने का सामना भी करना पड़ता है।

सामान्यतः एक बार ईएमआई तय होने के पश्चात इसके पूर्ण भुगतान तक इसमें परिवर्तन की गुंजाइश नहीं होती है। ऋण लेते समय दूसरा सबसे प्रमुख पहलू ब्याज दर से सम्बंधित होता है। अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर अलग-अलग होती है। हमें ऋण लेने से पहले यह जरूर पता कर लेना चाहिए कि हमारे लिए किस बैंक की ब्याज दर उपयुक्त है।

दरअसल ब्याज दर का निर्धारण खरीददार की क्रेडिट हिस्ट्री तथा सिबिल स्कोर आदि देखकर भी तय किया जाता है जिसकी वजह से ब्याज दर हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।

घर बेचने वालों का परम उद्देश्य येन केन प्रकारेण अपने घर को बेचना होता है तथा इसके लिए वे विभिन्न प्रकार के आकर्षक प्रलोभन देते रहते हैं। इन प्रलोभनों में से एक प्रलोभन घर को निवेश के लिए उपयुक्त बताना होता है।

बहुत बार लोग ऐसे प्रलोभन में आकर ऐसे घर को खरीद लेते हैं जो उन्हें रहने के लिए अधिक पसंद नहीं होता है तथा जब वह घर अच्छे दामों में नहीं बिक पाता है तब मजबूरीवश उन्हें मन मारकर उसी घर में रहना पड़ता है।

दरअसल रिहायशी तथा निवेश दोनों का मकसद बहुत अलग होता है तथा आमतौर पर निवेश के लिए घर उस लोकेशन पर मिलता है जहाँ पर ज्यादा आबादी नहीं होती है।

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अगर हम रहने के लिए घर खरीद रहे हैं तो निवेश और मुनाफे का लालच न करके उसे सिर्फ और सिर्फ रहने के मकसद से खरीदे।

उपरोक्त कुछ बातों का ध्यान रखकर हम अपने सपनों का घर खरीद सकते हैं तथा चिंतामुक्त होकर उसमे सुकून के साथ अपनी जिन्दगी गुजार सकते हैं।

Written by:
Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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