वेलेंटाइन डे का भारतीय परिप्रेक्ष्य में महत्व

वेलेंटाइन डे का भारतीय परिप्रेक्ष्य में महत्व - कहते हैं प्रेम की ना तो कोई भाषा होती है तथा ना ही कोई बंधन होता है। भाषा तथा बंधन से मुक्त होने की वजह से प्रेम कभी भी, कहीं भी तथा किसी से भी हो सकता है।

भंसाली प्रकरण अन्य फिल्मकारों के लिए सबक

भंसाली प्रकरण अन्य फिल्मकारों के लिए सबक - संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट वाले मामले में फिल्म उद्योग से मिली जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई है।

अभिनेत्रियाँ जिन्होंने प्यार के लिए अपना धर्म बदल लिया

अभिनेत्रियाँ जिन्होंने प्यार के लिए अपना धर्म बदल लिया - कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता है, हो जाता है तथा प्यार करने वालों के लिए धर्म, जाति का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

स्कूल बसों का रंग पीला होने का ये है कारण

स्कूल बसों का रंग पीला होने का ये है कारण - हमारे दिमाग में एक प्रश्न जरूर कौंधता है कि सभी स्कूल बसों का रंग पीला क्यों होता है?

सलमान खान का पहला वेतन

सलमान खान का पहला वेतन - सलमान खान अपने द्वारा प्रस्तुत रियलिटी शो बिग बॉस के ग्यारहवें संस्करण की कमाई को बताने में भले ही हिचकते हों परन्तु उन्होंने हाल ही में यह बताया कि उनकी पहली कमाई के बतौर उनको पचहत्तर रूपए मिले थे।

वेबसाइट के लिए वेब होस्टिंग का महत्व

वेबसाइट के लिए वेब होस्टिंग का महत्व - किसी भी वेबसाइट के लिए अत्यावश्यक चीजों में वेब होस्टिंग (Web Hosting) शामिल होती है।

डोमेन का वेबसाइट में उपयोग

डोमेन का वेबसाइट में उपयोग - आधुनिक युग पूर्णतया सूचना प्रौद्योगिकी का युग है जिसमे कंप्यूटर और इन्टरनेट से सम्बंधित ज्ञान अति आवश्यक है।

केवल आम जनता ही कैशलेस क्यों

केवल आम जनता ही कैशलेस क्यों - पिछले दिनों अखबारों मेंक खबर आई कि राजनीतिक दलों को बंद हो चुकी करेंसी के पाँच सौ और एक हजार रुपये चंदे में लेने की छूट दे दी गई है तथा इन दलों से इस चंदे के बारे में किसी भी तरह की पूछताछ भी नहीं की जाएगी।

क्या मर्द औरत की यौन शक्ति से डरता है

क्या मर्द औरत की यौन शक्ति से डरता है - ईश्वर ने मानव के अतिरिक्त अन्य सभी प्राणियों में नर तथा मादा को लगभग समान रूप से ताकतवर बनाया है।

भारत और रूस की टूटती मित्रता

भारत और रूस की टूटती मित्रता - भारत और रूस की दोस्ती पंडित जवाहरलाल नेहरु के जमाने से ही है तथा इस दोस्ती की गाँठ इतनी मजबूत है कि हर भारतवासी को इस दोस्ती पर नाज रहा है।

ये दुनिया के बदलते रिश्ते

ये दुनिया के बदलते रिश्ते - “ना जाने कैसे, पल में बदल जाते हैं, ये दुनिया के बदलते रिश्ते”, बचपन में जब रेडियो पर रफी साहब का ये गाना बजता था तब ना तो इसका मतलब पता था और ना ही पता करने की कोई जिज्ञासा होती थी, महज दूसरे गानों की तरह इसे भी सुनकर भूल जाया करते थे।

प्रधानमन्त्री को परिवार के प्रति जिम्मेदारी का अहसास

प्रधानमन्त्री को परिवार के प्रति जिम्मेदारी का अहसास - न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की (John Key) के इस्तीफे की खबर का शीर्षक जब समाचार पत्र में छपा तो लगा जैसे कि यह कोई नई बात नहीं है और ऐसे इस्तीफे तो आये दिन दिए जाते हैं परन्तु खबर को विस्तारपूर्वक पढ़ने पर लगा कि यह कोई साधारण कार्य नहीं है।

राष्ट्रगान की अनिवार्यता और देशभक्ति

राष्ट्रगान की अनिवार्यता और देशभक्ति - अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में देश के सभी सिनेमाघरों में फिल्म के शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य कर दिया है।

नोटबंदी से पूर्ववर्ती स्थिति में वापसी

नोटबंदी से पूर्ववर्ती स्थिति में वापसी - कालेधन की रोकथाम के लिए सरकार ने नोटबंदी से पहले इनकम डिस्क्लोजर स्कीम लागू की थी जिसमे पैंतालीस प्रतिशत टैक्स चुकाकर अपने धन को वैध करने का प्रावधान था।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर उठते प्रश्न

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर उठते प्रश्न - अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए एक पखवाड़े से अधिक समय बीत चुका है।

देशभक्ति के नए पैमाने

देशभक्ति के नए पैमाने - भारत में जब आजादी के लिए आन्दोलन चल रहा था उस वक्त भारत की आजादी में किसी भी तरह से दिया गया योगदान तथा अपनी मातृभूमि से प्यार देशभक्ति की श्रेणी में आता था।

क्या बलात्कार के लिए पुरुष प्रधान समाज जिम्मेदार है

क्या बलात्कार के लिए पुरुष प्रधान समाज जिम्मेदार है - कहने को तो बलात्कार भी आम शब्दों की तरह ही एक शब्द है परन्तु इसका मतलब बहुत भयावह तथा घिनौना है।

नोटबंदी का आमजन और व्यापार पर असर

नोटबंदी का आमजन और व्यापार पर असर - प्रधानमंत्री को एक हजार और पाँच सौ के बड़े नोट बंद करने की घोषणा किये लगभग दस दिन बीत चुके हैं परन्तु बैंकों में कतारें कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है।

सरकार भी रोज नए-नए नियम लागू कर रही है। कभी तय होता है कि एक दिन में चार हजार रुपये तक बदलवा सकते हैं, कभी उसे बढ़ाकर साढ़े चार हजार कर दिया जाता है फिर अब घटाकर दो हजार कर दिया है।

एटीएम पर भी नकद निकासी की सीमा दो हजार रुपये प्रतिदिन थी जिसे भी बढ़ाकर ढ़ाई हजार कर दिया गया है। देश भर के किसी भी बैंक में जाने पर सिर्फ और सिर्फ कतारें ही कतारें दिखाई पड़ रही है। लोग घंटों इन कतारों में लगे रहते हैं परन्तु फिर भी उनका नंबर नहीं आ पा रहा है क्योंकि कतारें ही इतनी लम्बी है।

छह सात घंटों तक कतार में लगना तो एक सामान्य सी बात प्रतीत होती है। कई जगह तो लोग अलसुबह से ही कतार लगाने लग जाते हैं। कई बार गाली गलौच और मारपीट तक की नौबत भी आ जाती है।

आमजन का जीवन इस नोटबंदी से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा गरीब, दिहाड़ी वाले और बिना दिहाड़ी वाले मजदूर, किसान, मरीज, यात्री और जिनके घर में शादियाँ होनी है, आदि लोग प्रभावित हुए हैं।

अखबारों के अनुसार अब तक लगभग पैतालीस लोग इस नोटबंदी की घोषणा के पश्चात किसी न किसी तरह से प्रभावित होकर (चाहे कतार में लगकर या फिर सदमे से) मृत्यु को प्राप्त हो चुके है। कतार में लगे रहने के कारण गरीब और मजदूर के सामने अपने घर को चलानें का संकट पैदा होने लग गया है।

बैंक और एटीएम से पर्याप्त मात्रा में रकम नहीं मिलने के कारण बाजारों में पैसे की भारी कमी हो गई है जिसके कारण ऐसा लग रहा है कि जैसे पूरी व्यवस्था ही गड़बड़ा गई है क्योंकि किसी के पास भी नई मुद्रा में नकद रकम नहीं है।

भारत में व्यापार अधिकतर नकद पैसों से ही होता है तथा नकद पैसा नहीं होने के कारण व्यापार धंधे पूरी तरह से ठप्प पड़े हुए हैं। बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है तथा ये चर्चाओं के चौपाल मात्र बन कर कर रह गए हैं।

ट्रांसपोर्टरों के पास नकदी नहीं होने से खानें पीनें सम्बन्धी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई भी धीरे-धीरे प्रभावित हो रही है तथा इनको अपनी ढुलाई में लगे हुए ट्रकों को बंद करना पड़ रहा है।

अभी तक तो खानें पीनें सम्बन्धी आवश्यक वस्तुओं की इतनी कमी नहीं हुई है परन्तु अगर कुछ दिन तक यही स्थिति रही तो इन वस्तुओं की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण ये बहुत महंगी हो जाएगी।

आज की अर्थव्यस्था पूरी तरह से धन पर टिकी हुई है तथा जब व्यापारियों और आम जनता के पास धन की कमी हो जाती है तब इसका चरमराना निश्चित होता है। प्राप्त नवीनतम अनुमानों के अनुसार आगामी तिमाही में विकास दर में लगभग एक प्रतिशत तक की गिरावट का अंदाजा लगाया जा रहा है।

ये केवल एक अनुमान है तथा वास्तविक आंकड़े इस बात पर निर्भर करेंगे कि हम इस तरह की परिस्थिति से कब तक निकलेंगे। जितना अधिक वक्त इस परिस्थिति से निकलनें में लगेगा उतना ही ज्यादा अर्थव्यस्था को नुकसान होगा।

इन परिस्थितियों से बचा जा सकता था अगर सरकार की पहले से कोई पुख्ता तैयारी होती। अभी तक की परिस्थितियाँ तो यही इंगित कर रही है कि सरकार ने नोटबंदी का फैसला बिना पर्याप्त तैयारी के जल्दबाजी में उठाया। दो हजार के नोट बहुत कम (लगभग नगण्य) एटीएम से ही निकल पा रहे हैं क्योंकि इनको नए नोटों के हिसाब से कैलिब्रेट ही नहीं किया गया।

देश में स्थित कुल एटीएम में से लगभग बीस प्रतिशत से ज्यादा एटीएम पैसे नहीं दे पा रहे है और जो एटीएम पैसे दे रहे हैं उनमे दो तीन घंटे में पैसा समाप्त हो जाता है।

अभी तक तो इस बात की भी कोई पुष्टि नहीं है कि इस नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा या नकारात्मक। बड़े नोट बंद करके फिर उनसे भी बड़े नोटों को पुनः प्रचलन में लाना भी अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रश्न है।

क्या बड़े नोटों को पुनः प्रचलित करने से सरकार का वह उद्देश्य समाप्त नहीं हो जायेगा जिसके लिए उसने पुराने नोटों को चलन से एकाएक बाहर कर दिया?

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