नीता की शादी की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही थी वैसे-वैसे घर में चहल पहल बढ़ती जा रही थी। घर में मेहमानों का जमघट लगना शुरू हो गया था। नीता नें भी अपने मन में होने वाले ससुराल के प्रति कई सपनें पाल रखे थे।

आज ऑफिस के लिए देर हो रही थी इसलिए मैं जल्दी-जल्दी घर से ऑफिस के लिए निकल पड़ा। मेरा ऑफिस घर से करीब चालीस किलोमीटर दूर स्थित है और मुझे वहाँ पहुचनें के लिए पास ही के बस स्टॉप से रोज बस पकड़नी पड़ती है।

सुनील की माताजी का स्वभाव कुछ कठोर किस्म का था और वो सास के ओहदे पर पूर्ण शिद्दत के साथ विराजमान थी। सुनील की अभी नई नई शादी हुई थी और वो अरमानों के सपने संजोये भावी जिन्दगी के बारे में सोच रहा था। सुनील की पत्नी शिखा कुछ आधुनिक विचारो वाली महिला थी।