गोपीनाथ जी का मंदिर अति प्राचीन है तथा इसकी स्थापना श्रीमाधोपुर कस्बे की स्थापना के समय ही हुई थी। इसकी नींव बोहरा राजा खुशाली राम जी द्वारा नगर की स्थापना के समय ही अक्षय तृतीय के दिन 1761 में रखी गई।

इस मंदिर के निर्माण में उच्च कोटि के कारीगरों तथा शिल्पकारों का बहुत योगदान रहा है तथा मंदिर वास्तुकला का एक बेजौड़ उदहारण है। मंदिर में कई शैलियों के भित्ति चित्र उकेरे गए जो ढूँढाड, जयपुरी तथा किशनगढ़ शैलियों से प्रभावित थे क्योंकि उस वक्त इन्ही शैलियों का चलन अधिक था।

मंदिर के निर्माण कार्य में लगभग छः सात वर्षों का समय लगा था जिसमे मंदिर के गर्भगृह, बारादरी तथा सत्संग भवन का निर्माण पूर्ण हुआ। मंदिर निर्माण में संगमरमर का बहुतायत से इस्तेमाल हुआ है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात गोपीनाथ जी की भव्य मुर्ति को काशी के पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ प्रतिष्ठित किया।

राजा माधव सिंह द्वितीय ने निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात गोपीनाथ जी को “श्री गोपीनाथ राजा” घोषित करके फुसापुर तथा हाँसापुर के राजपूत जागीरदारों को इनके अधीन कर दिया। उसी वक्त से श्री गोपीनाथ जी श्रीमाधोपुर नगर के राजा के रूप में शेखावत राजपूतों के आराध्य देवता रहे हैं।

मंदिर की सेवा पूजा तथा देखरेख श्री ब्रह्म मध्व गौडीय सम्प्रदाय की परम्पराओं के अनुसार करने के लिए श्री वृन्दावन दास जी को प्रथम महंत नियुक्त किया गया। वृन्दावन दास जी के पश्चात श्यामदास जी, धर्मदास जी, बलराम दास जी, देवदास जी, रामदास जी, गोपालदास जी, नारायणदास जी, रघुनाथदास जी, जगदीशदास जी तथा मनोहरदास जी ने महंत बनकर मंदिर की सेवा करने का जिम्मा उठाया।

मंदिर में सभी उत्सव तथा त्यौहार भाईचारे तथा हर्षौल्लास के साथ मनाये जाते हैं। मनाये जाने वाले प्रमुख उत्सवों में जगन्नाथ रथयात्रा, शरद पूर्णिमा, अन्नकूट, गीता जयंती, विवाह पंचमी, नवरात्री समारोह, अक्षय तृतीया, निर्जला एकादशी, राधाष्टमी, होली, बसंत पंचमी, फागोत्सव तुलसी सालिग्राम विवाह आदि प्रमुख है।

उपरोक्त उत्सवों में जगन्नाथ रथयात्रा सर्वप्रमुख तथा अत्यंत प्रसिद्ध है। यह रथयात्रा पूरी की जगन्नाथ रथयात्रा की तर्ज पर उसी दिन निकाली जाती है इसमें भगवान गोपीनाथ के रथ को सम्पूर्ण नगर में घुमाया जाता है। रथयात्रा के समय अपार जनसमूह उमड़ता है जिसकी वजह से नगर एक धार्मिक नगरी के रूप में प्रतीत होता है।

श्रीमाधोपुर में स्थित गोपीनाथ जी का भव्य मंदिर Magnificent temple of Gopinath Ji Shrimadhopur