जब से हमारे प्रधान सेवक ने पकौड़े तलने को रोजगार से जोड़ा है तब से देश में पकौड़ा पॉलिटिक्स को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी ने चायवाले के मुद्दे को लपक लिया था ठीक उसी प्रकार इस बार विपक्षी पार्टियों ने पकौड़े तलने का मुद्दा झपट लिया है।

अजमेर, अलवर व माण्डलगढ़ उपचुनाव परिणाम ने राजस्थान मे इस साल के अन्त मे होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व को सकते मे डाल दिया है। राजस्थान सरकार के चार साल पूरे हो चुके है। सरकार व संगठन की जन स्वीकार्यता मे कमी भी उजागर हुई है।

वैसे तो पूरे देश से ही डॉक्टर्स के आए दिन हड़ताल पर जाने की खबरें आती रहती है परन्तु राजस्थान इसका अपवाद सा प्रतीत होता है। किसी न किसी बात को लेकर यहाँ कभी डॉक्टर्स हड़ताल पर रहते हैं तथा कभी रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर रहते हैं। इनकी इस हड़ताल की वजह से आम जन बहुत परेशान रहता है। सबसे अधिक परेशान वे मरीज होते हैं जो पहले ही बहुत परेशान तथा दुखी होते हैं।

इस वर्ष के अंतिम महीनों में राजस्थान विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनावी वर्ष होने के कारण राज्य सरकार की कुम्भकर्णी नींद टूट गई है तथा यह बेरोजगारों को लुभाने के लिए ब्रूस ली की सी चपलता के साथ नौकरियों की विज्ञप्तियों के विज्ञापन पर विज्ञापन निकाल रही है। रोज किसी न किसी विभाग में नौकरियों के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं।