इस वर्ष के 25 दिवसीय ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2019’’ में 4 से 28 जनवरी के बीच 4,237 नगरों और शहरों में सर्वेक्षण किया जा चुका है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में श्रीमाधोपुर ने 4000 अंकों में से कुल 2451 अंक प्राप्त कर सीकर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने के साथ-साथ राजस्थान में सातवाँ तथा भारत के वेस्ट जोन (राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात और गोवा) के एक लाख से कम आबादी वाले 875 शहरों में 191वाँ स्थान प्राप्त किया था।

श्रीमाधोपुर की ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए मुख्यमंत्री से मांग- श्रीमाधोपुर कस्बे में लगभग 250 वर्षों से अधिक पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी स्थित है। यह बावड़ी हमारे पुरखों की निशानी होने के साथ-साथ हमारी विरासत भी है। यह बावड़ी श्रीमाधोपुर क्षेत्र की एकमात्र ऐतिहासिक धरोहर है। यह बावड़ी आस पास के क्षेत्र में सबसे बड़ी तथा भव्य बावड़ी है।

श्रीमाधोपुर विधानसभा, सीकर जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है। वर्तमान में यहाँ से भारतीय जनता पार्टी के झाबर सिंह खर्रा विधायक हैं। अक्सर इस विधानसभा क्षेत्र में एकांतर रूप से भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के उम्मीद्वार ही विधायक चुने जाते रहे हैं। कांग्रेस से दीपेन्द्र सिंह शेखावत भी इस क्षेत्र से कई मर्तबा चुने गए हैं।

श्रीमाधोपुर में गंभीर होती पेयजल समस्या - एक समय ऐसा था जब श्रीमाधोपुर कस्बे में बावड़ी स्थित केवल एक ही पानी की टंकी से पूरे कस्बे में पानी की सप्लाई होती थी तथा सभी लोगों को पर्याप्त मात्र में पानी उपलब्ध हो जाता था। नल सुबह तथा शाम अच्छे प्रेशर के साथ आया करता था।

क्यों नहीं है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में बावड़ी का नाम - श्रीमाधोपुर की प्राचीन बावड़ी जिसे सीताराम बाबा की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है, आज श्रीमाधोपुर वासियों द्वारा ही उपेक्षित हो रही है। लगभग 250 वर्ष पुरानी यह बावड़ी किसी समय अत्यंत भव्य रही है परन्तु आज यह अपनी बदहाली पर आँसू बहा रही है और श्रीमाधोपुर वासी उदासीन होकर इसे अनदेखा कर रहे हैं तथा इसे कूड़ादान बनाकर प्रसन्न हो रहे हैं।

शिक्षा तथा स्वास्थ्य दोनों ही समाज की प्रमुख आवश्यकताएँ हैं परन्तु अगर इनमे से भी प्राथमिकता की दृष्टि से देखा जाए तो शिक्षा का स्थान सर्वोपरि होता है। शिक्षा ही मानव का वह गुण है जो उसे पशुओं से भिन्न बनाता है।

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा - श्रीमाधोपुर कस्बे का इतिहास लगभग 250 वर्ष पुराना है। इतने पुराने इतिहास को अपने आगोश में समेटे यह शहर नित नए परिवर्तन देखते हुए आगे बढ़ रहा है। व्यापारिक रूप से तो यह शहर प्रारंभ से ही संपन्न रहा है। बर्तनों तथा कपड़ों का व्यापार यहाँ बहुत फूला फला है परन्तु समय के परिवर्तन ने बहुत कुछ बदल दिया है।

श्रीमाधोपुर अजीतगढ़ स्टेट हाईवे की दुर्दशा - श्रीमाधोपुर अजीतगढ़ स्टेट हाईवे इस क्षेत्र की जीवन रेखा है जो जयपुर दिल्ली हाईवे नंबर 48 को जयपुर सीकर हाईवे नंबर 52 के मध्य की दूरी को काफी कम करके एक शॉर्टकट का कार्य करते हुए सीधा जोड़ता है। यह हाईवे शाहपुरा, त्रिवेणी धाम, अजीतगढ़ आदि से श्रीमाधोपुर को जोड़ने का प्रमुख मार्ग है।

श्रीमाधोपुर में नया औद्योगिक क्षेत्र खुलेगा परन्तु पुराने की सुध नहीं - शेखावाटी क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए रीको नए-नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने जा रही है जिसके लिए रीको ने श्रीमाधोपुर एवं नीमकाथाना के दो औद्योगिक क्षेत्रों का प्रपोजल तैयार किया है।

श्रीमाधोपुर रोडवेज बस डिपो की खस्ताहाल हालत - स्थानीय रोडवेज बस डिपो की खस्ताहाल हालत का खामियाजा यात्रियों को नियमित रूप से उठाना पड़ रहा है परन्तु फिर भी इन बसों को सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। यात्रियों को इन बसों पर इतना भी यकीन नहीं रहा कि वो अपनी यात्रा सकुशल पूर्ण कर लेंगे क्योंकि अक्सर ये बसें कहीं पर भी खराब होकर खड़ी हो जाती हैं।