परीक्षा का नाम सुनते ही विद्यार्थियों में खलबली मचना शुरू हो जाती है तथा उनमे एक अजीब तरह का भय छाने लगता है जैसे परीक्षा कोई भूत प्रेत का नाम हो। परीक्षा की तिथि की घोषणा होते ही परीक्षार्थियों की जीवन शैली में यकायक परिवर्तन आना शुरू हो जाता है।

देश में 4 जी तकनीक के प्रवेश के साथ ही डाटा इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में यकायक ही भारी इजाफा देखने को मिला है जिसकी वजह डाटा की खपत में भी बहुत बढ़ोतरी हुई है। स्मार्टफोन की बढ़ती लोकप्रियता तथा सस्ती दरों पर इसकी उपलब्धता ने इस डाटा खपत को बढ़ाने में आग में घी का काम किया है।

करियर का चुनाव करते समय विधार्थी अपने आपको दोराहों पर खड़ा पाता हैं क्योकिं आज के समय में विद्यार्थियों के पास अपना करियर चुनने के बहुत अधिक विकल्प उपस्थित होते हैं। एक तो विकल्पों की अधिकता तथा दूसरा पेरेंट्स का ज्ञात और अज्ञात दबाब काफी हद तक इस भ्रम की स्थिति को पैदा करता हैं।

माननीय शीर्ष अदालत ने अपने एक फैसले में यह साफ कर दिया है कि किसी तरह का कोई भी टेक्निकल कोर्स दूरस्थ माध्यम से नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा है किसी भी तरह की टेक्निकल शिक्षा दूरस्थ पाठ्यक्रम और माध्यम से नहीं पढ़ाई जा सकती है।

English language is no doubt a foreign language but is an international language as too. At present so many people are extremely interested to speak English and that too fluently. Speaking English in friend circles, interviews has become so important that people try to learn it by either hook or crook.

पढ़ाई के तौर तरीके इतने अधिक बदल गए हैं कि अब विद्यार्थी, विद्यार्थी न रहकर रोबोट बनते जा रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई सिर्फ इसलिए करवाई जा रही है कि वो अपनी परीक्षा में आने वाले विषयों को अच्छी तरह से तोते की तरह रटकर जब भी पूँछा जाए उसे सुना दे। शायद पढ़ाई बौद्धिक विकास के लिए कम तथा अधिक से अधिक अंक प्राप्त करने के लिए करवाई जा रही है।

Pharmacy profession is being controlled by regulating bodies like All India Council for Technical Education (AICTE) and Pharmacy Council of India (PCI) which is a statutory body of Government of India under the Pharmacy Act 1948.

आजकल जिस घर में नजर डालो उसी घर में सिर्फ एक ही नजारा देखनें को मिलता है जिसमे पेरेंट्स बच्चों की पढाई को लेकर बहुत चिंतित नजर आते हैं। पेरेंट्स बच्चों को हर वक्त एक उपदेशक की भाँति उपदेश देते हुए नजर आते हैं जिसमे वो पढाई के फायदे बता रहे होते हैं और येनकेन प्रकारेण पढ़नें के लिए प्रेरित करते हुए नजर आते हैं।

When AICTE came into existence it laid emphasis on norms and standards for technical institutions offering professional and technical courses like Engineering, Management, Pharmacy, Computer applications, Hotel management etc.

बहुत से शिक्षकों को यह कहते हुए सुना जाता है कि वो बहुत अच्छा पढ़ाने की कोशिश करते है परन्तु विद्यार्थी उनसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं होते हैं। बहुत से विद्यार्थियों को शिक्षक का पढ़ाया हुआ समझ में नहीं आता है परन्तु शिक्षक के यह पूछने पर कि “तुम्हे समझ में आ रहा है” तो वे तुरंत हाँ में जवाब देते हैं।

दसवीं कक्षा यानि कि सेकेंडरी क्लास की परीक्षाएँ जैसे-जैसे समाप्ति की तरफ बढती है वैसे-वैसे ही अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ना शुरू हो जाती हैं। चिंतातुर होनें का मुख्य कारण दसवीं कक्षा के बाद उचित विषयों का चयन करना होता है। अभिभावक इसी सोच विचार और मंथन में मशगूल हो जाते हैं कि बच्चे के लिए किस विषय का चुनाव किया जाए।

मैट्रिकुलेशन अथवा दसवीं कक्षा किसी भी विद्यार्थी के करियर का आधार स्तंभ होती है तथा दसवीं कक्षा के परिणाम के आते ही छात्रों के मन में उत्पन्न होने वाला सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही होता है कि अब दसवीं के बाद क्या करें? विद्यार्थियों के साथ-साथ यह उनके माता पिता के लिए भी बड़ा प्रश्न बन कर उभर आता है।

The latest decision by health ministry to amend Medical Council Act and preparation of draft to make medicos to qualify an exit exam in order to practice after passing MBBS. This very decision is no doubt under process and is open for suggestions and discussion in the country.