भारत ने अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तथा यादगार छलांग लगाकर सारी दुनिया को तब आश्चर्यचकित कर दिया जब उसने एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया। इन 104 उपग्रहों में से 101 उपग्रह विदेशी थे जिनमे से 96 उपग्रह अमेरिका के थे। यह कारनामा पीएसएलवी सी-37 ने कर दिखाया।

यह कार्य करके इसरो ने अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया इतिहास लिखा है जिसे भावी पीढ़ियाँ सदियों तक याद करेंगी।

यह सफलता उस वक्त और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब इसरो ने अपने सीमित संसाधनों का प्रयोग करते हुए इसे सफल बनाया। इसरो का सालाना बजट नासा के सालाना बजट के मुकाबले कई गुना कम है। यह हमारे वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों तथा क्षमताओं का ही नतीजा है कि वो यह विश्व कीर्तिमान बनाने वाला कारनामा कर पाए।

इसरो ने अपनी क्षमताओं का परिचय तो उस वक्त ही दे दिया था जब उसने अपने पहले प्रयास में ही मंगल यान को मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। फिर उसके पश्चात जून 2015 में एक साथ 23 उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षाओं में उतारकर अपने बुलंद हौसलों का परिचय दे कर यह जता दिया था कि जल्द ही वह कुछ बहुत बड़ा कार्य करने जा रहा है।

इसरो का पूरा नाम इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (ISRO) है जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। पंडित जवाहरलाल नेहरु तथा वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने 1962 में इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च (INCOSPAR) का गठन किया था तथा 1969 में इसका नाम बदलकर इसरो रखा गया। इसरो ने सबसे पहला उपग्रह आर्यभट्ट बनाया था जिसे सोवियत रूस की मदद से 19 अप्रैल 1975 को प्रक्षेपित किया गया।

हमारे लिए सबसे अधिक गर्व की बात यह है कि कल तक जो विकसित देश भारत को सपेरों तथा जादूगरों का देश समझते थे आज उन्ही देशों को अपने उपग्रह भारत से प्रक्षेपित करवाने पड़ रहे हैं। भारत से उपग्रह प्रक्षेपित करवाने में उन देशों को अपने स्वयं के देश से उपग्रह प्रक्षेपित करवाने के मुकाबले काफी कम खर्च आता है।

भारत उन्नत तकनीक के साथ-साथ बहुत कम खर्च में वह कार्य कर रहा है जिनके लिए विकसित देश कई गुना अधिक खर्च वसूल रहे हैं। भारत का लोहा अब दुनिया के सभी देश माननें लग गए हैं तथा भारत अब अन्तरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के कुछ चुनिन्दा देशों में शामिल हो गया है।

हमारे देश के वैज्ञानिकों ने अपने देश के साथ-साथ हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है तथा विश्व बिरादरी को भारत के बारे में अपनी धारणाएँ बदलने को मजबूर कर दिया है। अगर हम इसी तरह से प्रगति के पथ पर अनवरत बढ़ते रहें तो वह दिन दूर नहीं है जब भारत पुनः विश्व का पथ प्रदर्शक बन जायेगा तथा दुनिया का उचित मार्गदर्शन करेगा।

भारत की सभ्यता तथा संस्कृति बहुत प्राचीन है तथा इसके हिसाब से तो पूरी दुनिया में हमारा कोई मुकाबला नहीं है। आध्यात्मिक रूप से भारत हमेशा से ही विश्व गुरू रहा है। हम सब यही उम्मीद करते हैं कि जल्द ही भारत पुनः सोने की चिड़िया भी बन जाये ताकि सभी सुखी और खुशहाल रह सकें।

विश्व कीर्तिमान के साथ इसरो की यादगार सफलता World record of ISRO with a memorable success