कालेधन की रोकथाम के लिए सरकार ने नोटबंदी से पहले इनकम डिस्क्लोजर स्कीम लागू की थी जिसमे पैंतालीस प्रतिशत टैक्स चुकाकर अपने धन को वैध करने का प्रावधान था। इस योजना के तहत सरकार को लगभग पैंसठ हजार करोड़ रुपये मिले थे तथा इस योजना की सफलता पर भी कई प्रश्नचिन्ह लगे थे।

फिर सरकार ने आठ नवम्बर के दिन यकायक से पाँच सौ और एक हजार के नोटों को चलन से बाहर कर दिया तथा उसके स्थान पर पाँच सौ और दो हजार के नए नोट शुरू हुए।

तब से अब तक रोज कुछ न कुछ नए नियम आते जा रहे हैं तथा अब सबसे नया नियम आयकर कानून में संशोधन के बिल के रूप में सामने आया है कि जिसे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में पेश किया है। यह बिल शीघ्र ही पास होकर कानून का रूप ले लेगा क्योंकि लोकसभा में सरकार के पास पूर्ण बहुमत है तथा राज्य सभा इसका सिर्फ रिव्यु ही करेगी।

इस बिल के अनुसार कोई भी नागरिक पचास प्रतिशत टैक्स चुकाकर अपने कालेधन को सफेद कर सकता हैं। उससे न तो कोई स्त्रोत पूछा जायेगा तथा न ही कोई कार्यवाही की जाएगी। इस पचास प्रतिशत सफेद धन में से पच्चीस प्रतिशत तुरंत मिल जायेगा तथा शेष पच्चीस प्रतिशत चार साल तक सरकार के पास जमा रहेगा जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। इस स्कीम का फायदा वे सभी लोग उठा सकते हैं जिन्होंने दस नवम्बर से बैंक में पैसा जमा करवाया है। अगर आयकर विभाग स्वयं कार्यवाही करके कालाधन पकड़ता है तो टैक्स और पैनल्टी के रूप में पिच्यासी प्रतिशत कटौती की जाएगी।

यह स्कीम पूरी तरह से इनकम डिस्क्लोजर स्कीम की तरह से ही है अंतर केवल इतना ही है कि उसमे पैंतालीस प्रतिशत टैक्स लिया जा रहा था जबकि इसमें पचास प्रतिशत टैक्स लिया जाएगा। कुल मिलाकर इस स्कीम से केवल पाँच प्रतिशत टैक्स अधिक प्राप्त होगा। इस पूरी स्थिति को देखकर हम कह सकते हैं कि शायद हम पुनः उसी स्थिति में पहुँच गए हैं जहाँ से हमने शुरुआत की थी। आखिर हमें इस नोटबंदी का क्या फायदा हुआ? क्या सरकार का इच्छित उद्देश्य पूरा हुआ है? क्या कालाधन सरकार के पास आया?

आखिर यह कालाधन क्या है जिसके लिए इतनी सारी कवायद की जा रही है? कालाधन वह धन होता है जो कि बिना कोई टैक्स दिए इकठ्ठा किया जाता है अर्थात इस धन पर सरकार को किसी भी तरह का टैक्स नहीं मिलता है। यह धन पूरे सिस्टम में प्रचलित रहता है तथा रोजमर्रा की जिन्दगी में इसका बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अब वह जमाना नहीं है कि बिना टैक्स दिया हुआ धन कहीं पर दबाकर रखा जाता है बल्कि अब तो बहुत सी आर्थिक गतिविधियाँ इसी कालेधन पर निर्भर करती हैं। प्रॉपर्टी और ज्वेलरी सम्बन्धी व्यापार तो बहुत हद तक इसी धन पर निर्भर करता है।

सरकार को उम्मीद थी कि नोटबंदी से लोगों का कालाधन बेकार हो जायेगा और लोग कालेधन को बैंकों में जमा नहीं करवा पाएंगे परन्तु सरकार की उम्मीद के विपरीत लोगों ने पिछले बीस दिनों में ही लगभग आठ लाख करोड़ से अधिक का धन बैंकों में जमा करवा दिया। जिनके पास कालाधन होने की गुंजाईश थी उन्होंने विभिन्न तरीकों से अपना कालाधन सफेद कर लिया है।

कुल मिलाकर इतनी अफरा-तफरी और परेशानियों को झेल कर हम पुनः उसी स्कीम पर लौट आये हैं जिसको लगभग असफल कहा जा रहा था। कहा जा रहा है कि नोटबंदी वाली परिस्थितियों से भारत की विकास दर भी बहुत प्रभावित होगी तथा देश कम से कम पाँच वर्ष पूर्व वाली आर्थिक परिस्थिति में चला जाएगा।

नोटबंदी से पूर्ववर्ती स्थिति में वापसी Return to the previous stage of demonetisation