उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा के नतीजे चौकाने वाले साबित हुए हैं जिनमे भारतीय जनता पार्टी ने अस्सी प्रतिशत से अधिक सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया है। नोटबंदी के पश्चात यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी तथा उससे भी अधिक प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के लिए एक पैमाना बना दिया गया था जिसमे दोनों ही खरे उतरे।

प्रधानमंत्री के लिए तो नोटबंदी को लेकर इस चुनाव को एक तरह से जनमत संग्रह ही बना दिया गया था। जिस प्रकार सभी पार्टियों ने नोटबंदी की खुलकर आलोचना की थी उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि नोटबंदी का यह कदम भारतीय जनता पार्टी के लिए कहीं भारी न पड़ जाये।

परन्तु चुनाव परिणाम ने सभी आशंकाओं को निर्मूल साबित कर भारतीय जनता पार्टी को चौदह वर्ष के पश्चात उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने का मौका देकर उसका अघोषित वनवास समाप्त किया है। यह मौका इसलिए खास बन जाता है क्योंकि इस गठबंधन की राजनीति के दौर में जनता ने भारतीय जनता पार्टी को न केवल पूर्ण बहुमत दिया बल्कि उसे एक अपराजेय पार्टी के रूप में स्थापित भी कर दिया।

इस प्रकार की विजय की उम्मीद तो भारतीय जनता पार्टी के सर्वेसर्वाओं को भी कदापि नहीं थी परन्तु राजनेता बहुत चतुर होते हैं इसलिए वे कुछ भी जाहिर नहीं होने देते हैं। उत्तर प्रदेश की विजय भारतीय जनता पार्टी के लिए इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश सर्वाधिक लोक सभा सीटों वाला प्रदेश है तथा भारत की सत्ता संभालने के लिए शिखर पर जाने वाला मार्ग यहीं से शुरू होता है।

लोक सभा चुनाओं में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में ठीक इसी तरह के परिणाम दिए थे तभी उसे भारत की सत्ता सँभालने का मौका मिला। भारतीय जनता पार्टी पर अपने लोक सभा वाले परिणामों को दोहराने का खासा दवाब था तथा नोटबंदी के पश्चात तो यह दवाब बढ़कर तनाव तक पहुँच चुका था। ताजा नतीजों ने इस तनाव को दूर कर 2019 के लोक सभा चुनाओं के लिए एक नई ऊर्जा प्रदान की है।

राज्य सभा में अल्पमत में होने के कारण से कई महत्वपूर्ण विधेयक लटके रहते थे तथा सरकार स्वच्छंद रूप से फैसले ले पाने में अपने आप को असमर्थ महसूस करती थी। अब उसी राज्य सभा में बहुमत पा लेने के कारण सरकार वे सभी कार्य निर्बाध रूप से कर पाएगी। राष्ट्रपति के चुनाव में भी अब भारतीय जनता पार्टी अपने किसी उम्मीद्वार को बिना किसी परेशानी के चुनवा पाएगी।

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार होने के कारण अब उन मुद्दों के पूर्ण होने की उम्मीद भी काफी बढ़ गई है जो हमेशा से भारतीय जनता पार्टी की कार्यसूची में रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा की उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक बहुमत पा लेने के पश्चात राम मंदिर के लटके हुए मुद्दे को किस प्रकार पूर्ण किया जाता है या फिर मामला न्यायलय के अधीन बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

इसमें कोई शक नहीं है कि 2014 से भारतीय जनता पार्टी का समय बहुत शुभ तथा सफलता प्राप्त करने वाला चल रहा है। लोक सभा चुनाव से अब तक भारतीय जनता पार्टी ने बहुत से चुनाव जीत कर लगभग सम्पूर्ण भारत में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करवा दी है। भारतीय जनता पार्टी की प्राप्त निरंतर विजयों ने आम जन की आकांक्षाओं तथा उम्मीदों को भी उसी अनुरूप बढ़ा दिया है तथा अब उनका साकार होना बहुत जरूरी हो गया है।

आखिरी तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी का कद अपनी पार्टी से भी बहुत अधिक बढ़ गया है तथा उनका नाम पार्टी का पर्याय बन चुका है। जब किसी व्यक्ति का नाम उसकी पार्टी तथा देश पर भारी पड़ने लग जाता है तब बहुत सी परिस्थितियाँ बदलनें लग जाती है और देश एक नई दिशा में बढ़ने लग जाता है जो अकल्पनीय भी हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सुनामी के मायनें Meaning of tsunami of Bhartiya Janta Party in Uttar Pradesh