विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से जारी वर्ष 2016 के वार्षिक आँकड़ों पर आधारित ग्लोबल एयर पोल्यूशन डेटाबेस के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित पंद्रह शहरों में चौदह शहर भारत के हैं। कानपुर को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है।

सालाना सर्वे के आधार पर डब्ल्यूएचओ की तरफ से दो मई को जारी इस लिस्ट में पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर को शामिल किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से कुल 20 प्रदूषित शहरों की लिस्ट जारी की गई है। लिस्ट के अनुसार प्रदूषित शहरों में सबसे ऊपर कानपुर रहा है तथा इसके बाद फरीदाबाद, वाराणसी, गया, पटना, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मुज्जफरपुर, श्रीनगर, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला और जोधपुर का नंबर है।

इस सूची के जारी होने के बाद सभी भारतीयों के लिए आज का दिन बहुत शर्मनाक दिन है परन्तु ऐसा लगता है कि हम भारतीयों को शर्म भी नहीं आती है या फिर हम पूरी तरह से बेशर्म हैं। सम्पूर्ण दुनिया में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में भारत के शहरों ने मजबूती के साथ कब्जा जमा लिया है। प्रदूषित शहरों की सूची में हमने अपने पडौसी देशों पकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान आदि सभी को कोसो पीछे छोड़ दिया है।

बहुत से लोग तो हो सकता है कि इसमें भी इस बात की खुशी ढूँढ ले कि हमने इस क्षेत्र में भी पकिस्तान को धूल चटा दी है। ऐसे लोगों की जिन्दगी का उद्धेश्य ही शायद पाकिस्तान को पराजित करना है। अगर इन परिणामों पर गौर किया जाये तो ये परिणाम अत्यंत शर्मनाक हैं। इन परिणामों की वजह से भारत की साख पूरे विश्व में खराब हुई है तथा भारत की छवि एक प्रदूषित देश के रूप में बनी है।

भारत में गरीबी बहुत है तथा रोटी, कपडा और मकान सहित सभी मूलभूत आवश्यकताओं की काफी कमी है परन्तु यह तो शायद किसी ने भी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आम भारतीयों को स्वच्छ हवा के भी लाले पड़ जाएँगे। फाके करके दिन तो काटा जा सकता है परन्तु बिना शुद्ध हवा के दो घड़ी भी जीना असंभव है। धनी लोगों के तो शायद इस बात का भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि उनका जीवन एयर फिल्टर द्वारा स्वच्छ प्राणवायु लेते हुए बड़े मजे से गुजरता है। यह तो केवल आम नागरिक ही है जो जीते जी इस नर्क को भोग रहा है।

भारत का नाम दुनिया में खराब होने का श्रेय किसके माथे पर जाएगा? निःसंदेह रूप से यह जिम्मेदारी उन लोगों की बनती है जो सरकार चला रहे हैं। वैसे प्रदूषित शहरों की सूची में हम पहली बार शामिल नहीं हुए हैं परन्तु इस बार हमने दुनिया के अन्य शहरों का सूपड़ा इस सूची से साफ कर इसे खास बना दिया है।

डब्ल्यूएचओ की इस लिस्ट का असर उस आम भारतीय पर तो नहीं पड़ने वाला जो दो जून की रोटी के चक्कर में लगा हुआ है परन्तु उसे भी देश के अन्य नागरिकों की तरह शुद्ध हवा में रहने का पूर्ण अधिकार है। सबसे अधिक शर्मिंदगी तो उन भारतियों को उठानी पड़ेगी जो या तो प्रवासी हैं या फिर विदेश यात्राएँ करते रहते हैं।

राजनेताओं पर इस बात का कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि ये हमेशा की तरह चिकनी चुपड़ी बातें तथा लच्छेदार भाषणबाजी करके जनता को फिर से बेवकूफ बना देंगे तथा इस पुण्य कार्य में काफी हद तक सहायक हमारा मीडिया भी होगा। वैसे भी जनता की याददाश्त शोर्ट टर्म मेमोरी लोस की बीमारी होने की वजह से काफी कमजोर होती है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कानपुर दुनिया में शीर्ष वायु प्रदूषित शहर Kanpur is top air polluted city in world according to WHO